सिंगरौली। हुनर को पहचान और मेहनत को सम्मान मिले तो आत्मनिर्भरता की राह आसान हो जाती है। इसी सोच को साकार करते हुए गुरुवार को जिला न्यायालय परिसर में रेडक्रॉस बालिका खुला आश्रय गृह की बालिकाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई।
प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती, जरूरत होती है तो बस उसे उचित मंच और प्रोत्साहन की। इसका उदाहरण गुरुवार को जिला न्यायालय परिसर में देखने को मिला, जहां रेडक्रॉस बालिका खुला आश्रय गृह की बालिकाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई। बालिकाओं के हुनर से तैयार आकर्षक दीपक और सजावटी सामग्रियों ने न्यायिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। न्यायाधीशों ने कलाकृतियों की सराहना के साथ उनकी खरीदारी भी की और बालिकाओं का उत्साहवर्धन किया। इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी जिला शाखा सिंगरौली द्वारा संचालित बालिका खुला आश्रय गृह की बालिकाओं ने कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से इन उत्पादों को तैयार किया था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल कुमार खंडेलवाल की उपस्थिति में हुआ। इस दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बालिकाओं की रचनात्मकता और मेहनत की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके द्वारा तैयार की गई कलाकृतियां बेहद सुंदर और आकर्षक हैं। उन्होंने बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन एस.डी. सिंह ने बताया कि आश्रय गृह में जरूरतमंद बालिकाओं को निःशुल्क संरक्षण, शिक्षा, पोषण और कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे हुनरमंद बनकर आत्मनिर्भर हो सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। कार्यक्रम में कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश प्रिवेंद्र कुमार सेन सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव धर्मेंद्र सोनी, रेडक्रॉस पदाधिकारी एवं आश्रय गृह की टीम मौजूद रही। न्यायाधीशों द्वारा की गई खरीदारी बालिकाओं के आत्मविश्वास और स्वावलंबन को नई प्रेरणा देने वाली साबित हुई।



