छिंदवाड़ा। मां की जान बचाने के लिए एक बेटे ने अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में मां पर तेंदुए का हमला होते देख बेटा बिना अपनी जान की परवाह किए उससे भिड़ गया। करीब 25 मिनट तक चले संघर्ष के बाद बेटे ने मां को तेंदुए के चंगुल से सुरक्षित छुड़ा लिया। हालांकि इस दौरान तेंदुए ने बेटे पर भी हमला कर दिया, जिससे मां और बेटा दोनों घायल हो गए।
मां की जान पर आफत आई तो बेटे ने अपनी जान की परवाह किए बिना मौत से मुकाबला कर लिया। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां मां पर तेंदुए को हमला करते देख बेटा उससे भिड़ गया। करीब 25 से 30 मिनट तक चले संघर्ष के बाद उसने अपनी मां को तेंदुए के चंगुल से बचा लिया। हालांकि इस दौरान तेंदुए ने बेटे पर भी हमला कर दिया, जिससे मां-बेटा दोनों घायल हो गए। घटना सांवरी वन परिक्षेत्र के मुजावर माल गांव की है। जानकारी के अनुसार बुधवार शाम गीता बट्टी (50) जंगल से बकरियां चराकर घर लौटी थीं। घर से करीब 100 मीटर दूर बने कोठे में बकरियां बांधने के बाद जैसे ही वह बाहर निकलीं, अचानक तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। मां की चीख-पुकार सुनकर बेटा सनोज बट्टी (32) तत्काल मौके पर पहुंचा। मां को तेंदुए के चंगुल में फंसा देख वह बिना अपनी जान की परवाह किए उससे भिड़ गया। करीब आधे घंटे तक संघर्ष करने के बाद सनोज ने किसी तरह मां को तेंदुए के कब्जे से छुड़ा लिया। इस दौरान तेंदुए ने सनोज पर भी हमला किया और अंत में एक बकरी को लेकर जंगल की ओर भाग गया।
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तेंदुए के हमले में घायल गीता और सनोज को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गुरुवार को घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना। मां की जान बचाने के लिए बेटे द्वारा तेंदुए से मुकाबला करने की यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। संकट की घड़ी में सनोज ने जिस साहस का परिचय दिया, उसकी लोग सराहना कर रहे हैं।



