सिंगरौली। जिले में बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। प्रभारी कलेक्टर श्री संघप्रिय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पोषण समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन, पोषण आहार वितरण, कुपोषित बच्चों के उपचार और गर्भवती महिलाओं के पंजीयन की समीक्षा की गई।
जिले में कुपोषण की रोकथाम और महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। प्रभारी कलेक्टर संघप्रिय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पोषण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं, पोषण आहार वितरण और कुपोषित बच्चों के उपचार की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। प्रभारी कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सैम एवं मैम श्रेणी के बच्चों को चिन्हित कर उनका पंजीयन और उपचार सुनिश्चित किया जाए। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को तत्काल आवश्यकतानुसार पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाए। वहीं टेक होम राशन (टीएचआर) एवं हॉट कुक्ड मील की गुणवत्ता का भौतिक सत्यापन कर निर्धारित मापदंडों के अनुसार वितरण सुनिश्चित किया जाए। प्रभारी कलेक्टर ने सेक्टर सुपरवाइजरों को नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करने, बच्चों की उपस्थिति पर निगरानी रखने तथा कमियों को समय-सीमा में दूर कराने के निर्देश दिए। सभी केंद्रों का नियमित और निर्धारित समय पर संचालन सुनिश्चित करने को भी कहा।
बैठक में गर्भवती महिलाओं के एएनसी पंजीयन एवं स्वास्थ्य जांच तथा एनएसी पंजीयन शत-प्रतिशत कराने पर विशेष जोर दिया गया। प्रभारी कलेक्टर ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की समय पर स्वास्थ्य जांच से संभावित जोखिमों की पहचान कर जच्चा-बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इसके अलावा निर्माणाधीन आंगनवाड़ी भवनों की गुणवत्ता और स्थल चयन का सत्यापन करने तथा केंद्रों में बाल-सुलभ शौचालयों का निर्माण समय-सीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोषण कार्यक्रमों में लापरवाही या अनियमितता मिलने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।



