Singrauli Myar River Bridge Scam : सिंगरौली जिले में म्यार नदी पर पुल और पहुंच मार्ग निर्माण के भुगतान में कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), रीवा ने लोक निर्माण विभाग के दो तत्कालीन अधिकारियों और रीवा की एक निर्माण कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच एजेंसी के अनुसार, 7.37 लाख रुपये के मूल अंतिम बिल को कथित रूप से कूटरचित कर 40.91 लाख रुपये कर दिया गया। मामले में सरकारी माप पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ और रिकॉर्ड गायब करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
चाचर-कुल्हनिया मार्ग पर हुआ था निर्माण कार्य
यह मामला सिंगरौली जिले के चाचर से कुल्हनिया मार्ग पर म्यार नदी में पुल और पहुंच मार्ग के निर्माण से जुड़ा है। इस परियोजना का ठेका 5 फरवरी 2016 को रीवा की फर्म मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। निर्माण कार्य की स्वीकृत लागत 574.32 लाख रुपये थी और इसे 18 महीने में पूरा किया जाना था।
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जांच के अनुसार, ठेकेदार ने निर्धारित समय सीमा के लगभग चार महीने बाद 1 अगस्त 2018 को निर्माण कार्य पूरा किया। इसके बाद तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (SDO) सुशील कुमार मिश्रा ने जनवरी 2019 में 7 लाख 37 हजार 861 रुपये का अंतिम देयक भुगतान के लिए प्रस्तुत किया था।
16.78 लाख रुपये की पेनाल्टी से बचने का आरोप
विभागीय ऑडिट में निर्माण कार्य में देरी, टेस्ट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराने और अन्य कमियों के आधार पर 16 लाख 78 हजार 437 रुपये की पेनाल्टी निर्धारित की गई थी।
EOW की जांच में आरोप है कि पेनाल्टी से बचने के लिए तत्कालीन SDO सुशील कुमार मिश्रा ने ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग सेतु निर्माण उप संभाग सीधी के तत्कालीन उपयंत्री चंद्रशेखर तिवारी के साथ मिलकर सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर की।
माप पुस्तिकाओं में छेड़छाड़, रिकॉर्ड गायब करने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, निर्माण कार्य की माप से संबंधित महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज माप पुस्तिका क्रमांक 605 कार्यालय से गायब कर दी गई। वहीं, माप पुस्तिका क्रमांक 606 और 734 में काट-छांट और ओवरराइटिंग किए जाने की बात सामने आई।
आरोप है कि 1 नवंबर 2018 की पिछली तारीख में 40 लाख 91 हजार 300 रुपये का संशोधित अंतिम बिल तैयार किया गया। इसके जरिए मूल देयक की तुलना में 33 लाख 53 हजार 439 रुपये अधिक का भुगतान किया गया।
EOW के अनुसार, दस्तावेजों में कथित हेरफेर का उद्देश्य पेनाल्टी की राशि को शून्य करना, शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाना और संबंधित पक्षों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाना था।
तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
जांच के बाद EOW रीवा ने तत्कालीन SDO सुशील कुमार मिश्रा, तत्कालीन उपयंत्री चंद्रशेखर तिवारी और संविदाकार मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, रीवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 120-B तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
EOW ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। फिलहाल जांच एजेंसी की ओर से आगे की जांच और दस्तावेजों के परीक्षण की कार्रवाई की जा रही है। आरोपों पर संबंधित आरोपियों का पक्ष उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।



