Urjanchal Tiger
शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 |

No Live TV Stream Available

Please check back later.

प्रोजेक्ट चीता की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, गोली लगने से शावक की मौत; छह वनकर्मियों पर गिरी गाज

Om Prakash Shah

Author | Updated: 31 Oct 2026, 03:49 PM IST | 1 min read
Share:

मध्यप्रदेश। कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के नर चीता शावक KNG22 की गोली लगने से हुई मौत ने वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संरक्षित वन क्षेत्र में चीते को गोली मारे जाने और उपचार के दौरान उसकी मौत के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और तीन वनरक्षकों सहित छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।

कूनो नेशनल पार्क में चीता शावक KNG22 की गोली लगने से हुई मौत ने वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 19 महीने के नर चीते की मौत के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और तीन वनरक्षकों सहित छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, मुरैना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से हथियार बरामद किए हैं। जानकारी के अनुसार, 25 अक्टूबर को श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन के कंपार्टमेंट नंबर 748 में चीता शावक KNG22 गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला था। शुरुआती जांच के बाद उसे बेहतर उपचार के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा गया। वहां सीटी स्कैन में उसके शरीर के आंतरिक अंगों, मांसपेशियों, हड्डियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचने की पुष्टि हुई।

चिकित्सकों ने आपातकालीन सर्जरी के दौरान चीते के शरीर से पांच गोलियों के छर्रे निकाले, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई। जांच में सामने आया कि चीता गोली लगने से घायल हुआ था। घटना के बाद वन विभाग ने ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में छह कर्मचारियों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर मुरैना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर हथियार बरामद किए हैं। अब जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि संरक्षित वन क्षेत्र में हथियारों के साथ संदिग्ध लोगों की आवाजाही कैसे हुई और निगरानी तंत्र को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी।

कूनो में चीते की गोली लगने से हुई मौत ने प्रोजेक्ट चीता की सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि संरक्षित वन क्षेत्र में हथियार लेकर पहुंचे लोगों को समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका। अब जांच के जरिए घटना की पूरी सच्चाई और सुरक्षा में हुई चूक की जिम्मेदारी तय होने का इंतजार है।

Advertisement

ADVERTISEMENT