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Gender Equality : सेकेंड शिफ्ट” Second Shift और Working Women

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 28 Feb 2026, 08:58 AM IST | 1 min read
Gender Equality
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Working Women India : भारत में महिलाओं की नौकरी और आर्थिक भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। सरकारी और निजी क्षेत्र में महिलाओं की मौजूदगी पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। लेकिन 2026 में सामने आए सामाजिक और कार्यस्थल विश्लेषण बताते हैं कि आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद महिलाओं पर घरेलू जिम्मेदारियों का बोझ अभी भी कम नहीं हुआ है।

जानकर इस स्थिति को “सेकेंड शिफ्ट” (Second Shift Women) कहते हैं। इसका मतलब है कि नौकरी से लौटने के बाद महिलाओं की दूसरी ड्यूटी घर पर शुरू हो जाती है।

ऑफिस के बाद घर का पूरा काम भी संभालती हैं महिलाएं

हालिया सामाजिक अध्ययनों के अनुसार भारत में लाखों कामकाजी महिलाएं ऑफिस के बाद खाना बनाना, बच्चों की देखभाल, सफाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करने का काम करती हैं।

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शहरी और छोटे शहरों दोनों में यह स्थिति साफ देखी जा रही है। ड्यूल-इनकम परिवारों में पति-पत्नी दोनों कमाते हैं, लेकिन घरेलू काम की जिम्मेदारी अब भी महिलाओं पर ज्यादा रहती है।

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कुछ परिवारों में पुरुष सहयोग कर रहे हैं, लेकिन बराबरी का स्तर अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है।

महिलाओं के Health और करियर पर पड़ रहा असर

लगातार दोहरी जिम्मेदारी निभाने से महिलाओं को आराम का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इससे शारीरिक थकान के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ता है।

कई महिलाएं प्रमोशन, ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट के अवसरों का फायदा नहीं उठा पातीं। समय की कमी और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण वे करियर में आगे बढ़ने के मौके छोड़ देती हैं।

यह स्थिति लंबे समय में महिलाओं की प्रोफेशनल ग्रोथ को प्रभावित करती है।

मानसिक दबाव भी बड़ी समस्या बन रहा

घरेलू जिम्मेदारी सिर्फ शारीरिक काम तक सीमित नहीं होती। घर की योजना बनाना, बच्चों की पढ़ाई का ध्यान रखना, जरूरी चीजों को मैनेज करना और परिवार की जरूरतों को याद रखना भी बड़ी जिम्मेदारी है। इसे “मेंटल लोड” कहा जाता है।

जागरूकता बढ़ी, लेकिन बदलाव की रफ्तार अभी धीमी

2026 में इस मुद्दे पर जागरूकता जरूर बढ़ी है। कई परिवारों में पुरुष घरेलू काम में सहयोग कर रहे हैं। नई पीढ़ी में जिम्मेदारियों को साझा करने की सोच मजबूत हो रही है।

इसके बावजूद सामाजिक परंपराएं और पुरानी सोच अभी भी पूरी तरह नहीं बदली हैं। यही कारण है कि महिलाओं पर घरेलू जिम्मेदारी का बोझ अब भी ज्यादा है।

सच्ची समानता के लिए जिम्मेदारियों का बराबर बंटवारा जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि Gender Equality का मतलब सिर्फ आर्थिक समानता नहीं है। घर और परिवार की जिम्मेदारियों में भी बराबरी जरूरी है।

जब पति-पत्नी दोनों समान रूप से घरेलू और आर्थिक जिम्मेदारी निभाते हैं, तभी महिलाओं को सही मायनों में समान अवसर मिल सकते हैं।

2026 में यह मुद्दा फिर चर्चा में है और यह साफ हो गया है कि भारत में महिलाओं की असली बराबरी के लिए समाज की सोच और व्यवहार दोनों में बदलाव जरूरी है।

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