मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सोमवार से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। प्रदेशभर के करीब 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने और लंबित एरियर का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। हड़ताल का असर अस्पतालों की OPD सेवाओं पर साफ दिखाई दे रहा है और कई मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि सरकार ने पहले स्टाइपेंड संशोधन का आदेश जारी किया था, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक अप्रैल 2025 से नया स्टाइपेंड लागू होना था और उसी समय से एरियर भी दिया जाना चाहिए था। कई बार मांग रखने के बावजूद इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ, जिसके बाद डॉक्टरों ने हड़ताल का रास्ता चुना।
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इस हड़ताल का असर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, सागर और खंडवा जैसे शहरों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में देखा जा रहा है। अस्पतालों की OPD सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और कई जगहों पर सामान्य इलाज और जांच की प्रक्रिया धीमी हो गई है। मरीजों को पर्ची बनवाने और डॉक्टर से मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
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डॉक्टरों ने कहा है कि इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो। हालांकि नियमित ऑपरेशन और सामान्य सर्जरी टल सकती हैं। अस्पतालों में होने वाली कई तय सर्जरी फिलहाल आगे बढ़ाई जा सकती हैं। इससे दूर-दराज से इलाज कराने आए मरीजों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार से बातचीत जारी है। अगर स्टाइपेंड संशोधन और एरियर के भुगतान पर स्पष्ट फैसला होता है तो हड़ताल खत्म की जा सकती है। लेकिन अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज होने की संभावना भी जताई जा रही है।





