भारत ने अगले छह महीनों के लिए करीब 6,500 मीट्रिक टन चांदी के आयात की अनुमति दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब देश में चांदी की मांग कमजोर बताई जा रही है। रॉयटर्स की 22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, नई अनुमति से बाजार में चांदी की उपलब्धता बढ़ने और आयात पर लगने वाला अतिरिक्त प्रीमियम घटने की उम्मीद है।
भारत अपनी चांदी की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। इसलिए आयात के नियमों में बदलाव का असर घरेलू बाजार में आपूर्ति और कारोबारियों की खरीद पर पड़ सकता है।
Also Read
छह महीने में 6,500 टन चांदी आयात की अनुमति
रॉयटर्स के अनुसार, चार बुलियन कारोबारियों ने बताया कि उन्हें अगले छह महीनों के लिए करीब 6,500 टन चांदी आयात करने की अनुमति मिली है। इससे कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से चांदी खरीदकर भारत लाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि पूरी मात्रा में चांदी का आयात हो ही जाएगा। वास्तविक आयात कारोबारियों की खरीद, बाजार भाव और मांग पर निर्भर करेगा।

भारतीय बाजार में चांदी का प्रीमियम घटा
आयात संबंधी पाबंदियों के कारण भारत में चांदी की उपलब्धता प्रभावित हुई थी। ऐसे में घरेलू खरीदारों को अंतरराष्ट्रीय कीमत के ऊपर अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ रही थी। इस अतिरिक्त रकम को बाजार में प्रीमियम कहा जाता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बाजार में चांदी का प्रीमियम पिछले सप्ताह करीब 2.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था। 22 अक्टूबर को यह घटकर लगभग 45 सेंट प्रति औंस रह गया।
प्रीमियम घटने से आयात की लागत और घरेलू बाजार की स्थिति पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन इससे खुदरा बाजार में चांदी के भाव में उतनी ही गिरावट आएगी, यह तय नहीं है।
मई और जून में सख्त किए गए थे आयात नियम
भारत ने मई 2026 के मध्य में चांदी के कई रूपों के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा था। इसके बाद जून में चांदी के दाने और पाउडर के आयात पर भी नियम सख्त किए गए और पूर्व अनुमति की जरूरत लागू हुई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। इन बदलावों के कारण आयातकों के लिए चांदी खरीदने और भारत लाने की प्रक्रिया पहले से अधिक जटिल हो गई थी।
नई अनुमति से आयात की प्रक्रिया में राहत मिल सकती है, हालांकि आयात शुल्क और अन्य लागतें घरेलू कीमतों को प्रभावित करती रहेंगी।

त्योहारों के बावजूद मांग कमजोर
भारत में त्योहारों और शादी के मौसम में चांदी के आभूषणों, सिक्कों और अन्य उत्पादों की खरीद बढ़ती है। इस बार, हालांकि, कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच मांग में अपेक्षित तेजी नहीं आने की बात कारोबारियों ने कही है।
रॉयटर्स से बातचीत में एक बुलियन कारोबारी के मुताबिक, हाल में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट के बाद कुछ निवेशक सतर्क हैं। ऐसे में आयात की अनुमति से कारोबारियों को स्टॉक उपलब्ध रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन कमजोर मांग के कारण पूरी स्वीकृत मात्रा का आयात होना जरूरी नहीं है।
क्या चांदी के दाम घटेंगे?
आयात बढ़ने से बाजार में चांदी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और प्रीमियम कम रहने में मदद मिल सकती है। इसके बावजूद खुदरा कीमतों में गिरावट की गारंटी नहीं है।
भारत में चांदी का भाव अंतरराष्ट्रीय कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क तथा स्थानीय बाजार की मांग से प्रभावित होता है। इसलिए खरीदारी का फैसला लेने से पहले अपने शहर का ताजा भाव और ज्वेलर से मिलने वाली अंतिम कीमत जांचना जरूरी है।


