Urjanchal Tiger
बुधवार, 2 सितंबर 2026 |

No Live TV Stream Available

Please check back later.

Advertisement
Welcome Gift: 2,000 Reward Points

SBI BPCL Credit Card - Best Card for fuel!

बढ़ते तेल कि कीमत पर बचत !
SBI
Apply Now

सुभाष चंद्रा का ₹6.25 करोड़ repayment plan रुका, NCLT का आदेश

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 02 Sep 2026, 01:38 PM IST | 1 min read
Share:
Advertisement

नई दिल्ली। एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और जी एंटरटेनमेंट के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़े व्यक्तिगत दिवालिया मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच-सदस्यीय विशेष पीठ ने उस आदेश के अमल पर रोक लगा दी है, जिसके तहत ₹22,006.57 करोड़ के admitted creditor claims के मुकाबले सिर्फ ₹6.25 करोड़ के repayment plan को मंजूरी मिली थी।

इसके साथ ही NCLT ने सुभाष चंद्रा को अपनी संपत्तियों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से बेचने, ट्रांसफर करने या किसी अन्य तरीके से alienate करने से रोक दिया है। मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं और आगे सुनवाई के बाद तस्वीर साफ होगी।

₹22 हजार करोड़ के दावों के सामने ₹6.25 करोड़ का प्लान क्यों बना चर्चा का विषय?

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा जिस आंकड़े की हुई, वह है ₹22,006.57 करोड़ बनाम ₹6.25 करोड़। NCLT के 25 अगस्त के आदेश में सुभाष चंद्रा की ओर से प्रस्तावित repayment plan को मंजूरी मिली थी। इस योजना के तहत उनके creditors को ₹6.25 करोड़ का भुगतान किया जाना था, जबकि admitted claims की कुल राशि ₹22,006.57 करोड़ बताई गई थी।

New Edition

Read Today's E-Magazine

Swipe through the complete digital edition of Urjanchal Tiger right on your screen.

इस अंतर की वजह से इस प्रस्ताव को लेकर कई lenders और creditors ने आपत्ति जताई। मामले में recovery की बेहद कम राशि और voting process को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

Advertisement

NCLT की पांच सदस्यीय पीठ ने क्यों लगाई रोक?

मामला पहले एक दो-सदस्यीय NCLT पीठ के सामने था। दोनों सदस्यों के बीच repayment plan को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

इसके बाद मामले को तीसरे सदस्य के पास भेजा गया। तीसरे सदस्य ने 25 अगस्त को repayment plan को मंजूरी देने वाला आदेश दिया, लेकिन तीनों सदस्यों की राय और शर्तों में अंतर सामने आया। इसके चलते स्पष्ट बहुमत की स्थिति नहीं बन पाई।

यही गतिरोध दूर करने के लिए NCLT ने पांच-सदस्यीय विशेष पीठ गठित की। इस पीठ की अध्यक्षता NCLT अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल ने की। पीठ ने कहा कि पिछला आदेश फिलहाल लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि स्पष्ट बहुमत की राय सामने नहीं आई है।

अब सुभाष चंद्रा अपनी संपत्ति नहीं बेच सकेंगे

मामले में NCLT का दूसरा बड़ा निर्देश उनकी संपत्तियों से जुड़ा है।

विशेष पीठ ने सुभाष चंद्रा को, व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर, अपनी संपत्तियों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से बेचने, ट्रांसफर करने या अन्य तरीके से अलग करने से रोक दिया है। इसका उद्देश्य मामले की सुनवाई पूरी होने तक संबंधित संपत्तियों की स्थिति को सुरक्षित रखना है।

इसका मतलब यह नहीं है कि NCLT ने उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया है। फिलहाल आदेश का असर assets को alienate या transfer करने पर रोक के रूप में है।

मामला आखिर शुरू कैसे हुआ?

यह मामला उन कंपनियों से जुड़े कर्जों के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है, जिनके लिए सुभाष चंद्रा व्यक्तिगत guarantor थे।

Indiabulls Housing Finance ने 2022 में उनसे जुड़ी insolvency proceedings शुरू की थीं। बाद में मामला व्यक्तिगत insolvency प्रक्रिया तक पहुंचा और 2024 में insolvency plea स्वीकार की गई। इसके बाद कई creditors इस प्रक्रिया में शामिल हुए।

अब विवाद इस बात पर केंद्रित है कि repayment plan को किस तरह और किन शर्तों के साथ मंजूरी दी जानी चाहिए।

Creditors क्यों कर रहे हैं विरोध?

कई lenders ने प्रस्तावित recovery को लेकर आपत्ति जताई है। उनकी मुख्य चिंताओं में recovery की बेहद कम राशि के अलावा voting process और कुछ entities की भागीदारी से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।

मामला NCLAT तक भी पहुंचा है। Creditors की ओर से इस आदेश को चुनौती देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी और Solicitor General तुषार मेहता ने भी मामले में creditors की ओर से पैरवी की है।

आगे क्या होगा?

अब पांच-सदस्यीय NCLT पीठ मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद आगे का फैसला करेगी। फिलहाल ₹6.25 करोड़ वाला repayment plan लागू नहीं हो सकेगा। साथ ही संपत्तियों के transfer पर लगी रोक भी प्रभावी है।

इसलिए इस मामले में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ₹22,006.57 करोड़ के claims का अंतिम निपटारा ₹6.25 करोड़ में होगा। NCLT ने फिलहाल पुराने आदेश पर रोक लगाई है; अंतिम समाधान अभी बाकी है।

Advertisement

ADVERTISEMENT
Advertisement