Urjanchal Tiger
शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 |

No Live TV Stream Available

Please check back later.

Advertisement
Welcome Gift: 2,000 Reward Points

SBI BPCL Credit Card - Best Card for fuel!

बढ़ते तेल कि कीमत पर बचत !
SBI
Apply Now

ग्वालियर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला : “बालिग महिला अपनी मर्जी से जीने के लिए स्वतंत्र”

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 19 वर्षीय महिला को अपनी पसंद से प्रेमी के साथ रहने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपने जीवन के फैसले लेने का अधिकार है।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 06 Apr 2026, 05:27 PM IST | 1 min read
ग्वालियर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला : “बालिग महिला अपनी मर्जी से जीने के लिए स्वतंत्र”
Share:
Advertisement

मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 19 वर्षीय महिला को उसके प्रेमी के साथ रहने की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह अपनी इच्छा से जीवन के फैसले ले सके।

यह मामला तब शुरू हुआ जब महिला के पति अवधेश ने हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी को अनुज कुमार नामक व्यक्ति ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है। विवाह के लगभग एक साल बाद यह याचिका दायर की गई थी।

अदालत के निर्देश पर पुलिस ने महिला को ढूंढकर वन-स्टॉप सेंटर में रखा और फिर कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के दौरान महिला के पति, माता-पिता और उसका साथी, तीनों अदालत में मौजूद थे।

जब न्यायाधीशों ने महिला से उसकी इच्छा पूछी, तो उसने बिना किसी झिझक के कहा कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से रह रही है। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि वह न तो अपने पति के साथ रहना चाहती है और न ही अपने माता-पिता के साथ।

महिला ने अपने विवाह के बारे में भी जानकारी दी। उसने बताया कि उसकी उम्र 19 वर्ष है, जबकि उसके पति की उम्र 40 वर्ष है, यानी दोनों के बीच 21 साल का अंतर है। उसने वैवाहिक जीवन को असंतुलित बताते हुए दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए।

अदालत ने पहले उसे काउंसलिंग के लिए भेजा, ताकि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सके। हालांकि, काउंसलिंग के बाद भी महिला अपने निर्णय पर अडिग रही और अपने प्रेमी अनुज कुमार के साथ रहने की इच्छा दोहराई।

Advertisement

इस मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने की। अदालत ने कहा कि जब महिला किसी भी अवैध बंधन में नहीं है, तो याचिका का आधार समाप्त हो जाता है।

ग्वालियर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला : “बालिग महिला अपनी मर्जी से जीने के लिए स्वतंत्र”

कोर्ट ने महिला को उसके साथी के साथ जाने की अनुमति देते हुए यह भी कहा कि कानून में व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है। साथ ही, अदालत ने महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “शौर्य दीदी” नामक अधिकारियों को छह महीने तक निगरानी रखने के निर्देश दिए।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का भी समान रुख

इस फैसले से पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी 25 मार्च को एक समान टिप्पणी की थी। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने कहा था कि यदि एक विवाहित पुरुष किसी बालिग महिला के साथ उसकी सहमति से लाइव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो यह अपराध नहीं है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सामाजिक नैतिकता और कानून अलग-अलग हैं, और अदालतें केवल संवैधानिक अधिकारों के आधार पर निर्णय लेती हैं।

यह मामला एक साधारण पारिवारिक विवाद से शुरू हुआ, लेकिन अंत में यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की पुष्टि बनकर सामने आया। अदालत ने दो टूक कहा कि किसी भी बालिग व्यक्ति के जीवन के फैसले परिवार, समाज या विवाह के दबाव में नहीं लिए जा सकते।

Advertisement

Ad किराना दुकान Online Store Demo
Doctor - Mishra Poly Clinic
MISHRA POLY CLINIC
& NURSING HOME
Baliyari Road, Behind Ram Leela Maidan
Waidhan, MP 486886
☎ CALL NOW
📞 06266601178   |   Waidhan, Madhya Pradesh