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इलाहाबादी सेबिया अमरूद से किसानों की आय बढ़ाने की नई उम्मीद

GI Tag मिलने के बाद इलाहाबादी सेबिया अमरूद का निर्यात विदेशों तक पहुंचा। वैज्ञानिक खेती से उत्पादन बढ़ा, बीमारियों पर काबू और किसानों की आय दोगुनी होने की राह मजबूत।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 03 Feb 2026, 12:26 PM IST | 1 min read
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प्रयागराज जिले के किसानों के लिए यह साल बड़ी उपलब्धि लेकर आया है। यहां का प्रसिद्ध सुर्खा, जिसे इलाहाबादी सेबिया अमरूद के नाम से जाना जाता है, अब GI Tag के साथ वैश्विक बाजारों में अपनी जगह बना रहा है। GI Tag मिलने के बाद इसकी पहचान और विश्वसनीयता दोनों बढ़ी हैं, जिससे निर्यात के नए अवसर खुले हैं और किसानों को बेहतर दाम मिलने लगे हैं।

वैज्ञानिक खेती से बढ़ा उत्पादन और गुणवत्ता

सेबिया अमरूद की इस सफलता के पीछे वैज्ञानिक पद्धति से कलम द्वारा पौध तैयार करना और उन्नत बागवानी तकनीकों का उपयोग प्रमुख कारण है। इससे न केवल खेती का रकबा बढ़ा है, बल्कि फल की गुणवत्ता में भी स्पष्ट सुधार हुआ है। बेहतर आकार, रंग और स्वाद के कारण विदेशी बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

बीमारियों से गिरा था रकबा, अब वापसी की तैयारी

उद्यान विभाग के अनुसार, एक समय प्रयागराज मंडल में करीब 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सेबिया अमरूद की खेती होती थी। लेकिन पिछले दो दशकों में उकठा रोग, फ्रूट फ्लाई और नॉट रूट जैसी बीमारियों ने उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को नुकसान पहुंचाया। उकठा रोग में तने में फंगस पनपने से हरे-भरे पेड़ सूख जाते थे, जबकि नॉट रूट में जड़ों पर गांठ बनने से पोषण रुक जाता था। इन कारणों से खेती का रकबा घटकर लगभग 3 हजार हेक्टेयर रह गया और कई किसान केले जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर मुड़ गए।

नई तकनीक, नया भरोसा

अब रोग-प्रतिरोधी पौध, बेहतर जल निकासी, समय पर कीट-रोग प्रबंधन और वैज्ञानिक सलाह से किसानों का भरोसा फिर से अमरूद की खेती पर लौट रहा है। हालिया प्रगति रिपोर्ट (02-02-2026 तक) के मुताबिक, GI Tag के बाद निर्यात से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हुई है, जिससे स्थानीय किसानों को स्थिर बाजार और बेहतर कीमतें मिल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में यह फसल प्रयागराज मंडल के किसानों की आय दोगुनी करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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