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Bank FD News : मैच्योरिटी के बाद FD नहीं लौटाने पर बैंक को हाईकोर्ट की फटकार, 12% ब्याज और ₹10,000 मुआवजा देने का आदेश

केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि जनता के धन का प्रबंधन करने वाले बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे जमाकर्ताओं को उनकी मैच्योर हो चुकी Fixed Deposit (FD) की राशि समय पर लौटाएं।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 01 Jul 2026, 06:13 AM IST | 1 min read
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नई दिल्ली। Bank FD News : केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक धन रखने वाले बैंक अपने जमाकर्ताओं के प्रति जवाबदेह हैं और उन्हें मैच्योर हो चुकी एफडी का भुगतान समय पर करना चाहिए। तकनीकी कारणों का हवाला देकर भुगतान टालना स्वीकार्य नहीं है।

क्या था पूरा मामला?

मामला केरल के त्रिशूर के एक जमाकर्ता से जुड़ा है, जिसने वर्ष 2015 में मैच्योर हुई ₹5 लाख की Fixed Deposit का भुगतान मांगा था। बैंक ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद जमाकर्ता ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।

उपभोक्ता आयोग के आदेश को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा

जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक को ₹5 लाख की मूल राशि, 12% वार्षिक ब्याज तथा ₹10,000 मुआवजा और खर्च देने का आदेश दिया था।

बैंक ने इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन केरल हाईकोर्ट ने बैंक की अपील खारिज करते हुए उपभोक्ता आयोग के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने बैंक को भुगतान के लिए छह महीने का समय दिया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने टिप्पणी की कि

  • बैंक जनता के धन का प्रबंधन करते हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी है कि वे जमाकर्ताओं को समय पर भुगतान करें।
  • यदि बैंक की देनदारी निर्विवाद है, तो केवल तकनीकी आधार पर भुगतान रोकना उचित नहीं है।
  • ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।

उपभोक्ता आयोग जा सकते हैं जमाकर्ता

इस फैसले में हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सहकारी बैंक मैच्योर एफडी का भुगतान नहीं करते हैं, तो जमाकर्ता Consumer Forum (उपभोक्ता आयोग) में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। केवल सहकारी समितियों से जुड़े कानून होने के कारण उपभोक्ता आयोग का अधिकार समाप्त नहीं होता।

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FD निवेशकों के लिए क्या है सीख?

विशेषज्ञों के अनुसार

  • एफडी की मैच्योरिटी तिथि का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
  • भुगतान में अनावश्यक देरी होने पर पहले बैंक से लिखित शिकायत करें।
  • समाधान न मिलने पर बैंकिंग लोकपाल या उपभोक्ता आयोग का सहारा लिया जा सकता है।
  • सभी जमा रसीदें और पत्राचार सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

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