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इलाहाबाद हाई कोर्ट: पत्नी की गलती से पति बेरोजगार तो गुजारा भत्ता नहीं

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 24 Jan 2026, 01:05 PM IST | 1 min read
इलाहाबाद हाई कोर्ट: पत्नी की गलती से पति बेरोजगार तो गुजारा भत्ता नहीं
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी के कामों से पति कमाने में असमर्थ हो तो गुजारा भत्ता नहीं मिलेगा। कुशीनगर मामले में पत्नी की याचिका खारिज। जानिए पूरा फैसला।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी अपने कामों या गलतियों से पति को कमाने में असमर्थ बना दे तो गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती। यह फैसला कुशीनगर के एक मामले में आया।

एक होम्योपैथी डॉक्टर वेद प्रकाश सिंह ने अपनी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि पत्नी के भाई और पिता ने क्लिनिक में झगड़े के दौरान उन्हें गोली मार दी। इससे उनकी रीढ़ की हड्डी में गोली फंस गई। सर्जरी में लकवा का खतरा है। अब वे कम नहीं पा रहे।

फैमिली कोर्ट ने 7 मई 2025 को पत्नी की गुजारा भत्ता की अर्जी खारिज कर दी। पत्नी ने हाई कोर्ट में रिवीजन याचिका दायर की। जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला ने इसे भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

जस्टिस शुक्ला ने कहा, “पति का पत्नी का भरण-पोषण करना कर्तव्य है। लेकिन पत्नी पर ऐसा कोई कानूनी कर्तव्य नहीं।” उन्होंने आगे कहा, “पत्नी के परिवार के अपराधों से पति की कमाई बंद हो गई। ऐसे में गुजारा भत्ता देना अन्याय होगा।”

कोर्ट ने स्पष्ट किया। अगर पत्नी या उसके परिवार की वजह से पति की कमाने की क्षमता खत्म हो जाए तो वह भत्ता नहीं मांग सकती। यह फैसला समाज के सामान्य नियमों को ध्यान में रखते हुए लिया गया। कोर्ट ने कहा कि सच्चाई से आंखें नहीं बंद कर सकते।

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