छिंदवाड़ा। रेल यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भारतीय रेलवे आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। इसी कड़ी में छिंदवाड़ा से आमला के बीच करीब 104 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच 4.0’ को लेकर परीक्षण किया जा रहा है। इस अत्याधुनिक तकनीक का उद्देश्य सिग्नल की अनदेखी, ट्रेनों के बीच कम होती दूरी और मानवीय चूक के कारण होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करना है।
रेल यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे आधुनिक तकनीक अपना रहा है। छिंदवाड़ा से आमला के बीच करीब 104 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर अत्याधुनिक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच 4.0’ का परीक्षण किया जा रहा है। इस तकनीक से ट्रेनों के बीच टक्कर की आशंका कम करने, सिग्नल की अनदेखी रोकने और मानवीय चूक से होने वाले संभावित हादसों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। रेल परिचालन में कई बार सिग्नल को समय पर नहीं देख पाने, निर्धारित गति से अधिक रफ्तार या समय पर ब्रेक नहीं लगने जैसी परिस्थितियां दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। ऐसे में कवच प्रणाली एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के रूप में काम करती है। यदि लोको पायलट किसी खतरे की स्थिति में निर्धारित समय पर कार्रवाई नहीं करता, तो सिस्टम परिस्थितियों के अनुसार स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
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कवच प्रणाली रेलवे ट्रैक पर लगाए जाने वाले आरएफआईडी टैग, ट्रैकसाइड उपकरणों और इंजन में स्थापित तकनीकी उपकरणों की मदद से काम करती है। यह ट्रेन की स्थिति और सिग्नल से संबंधित जानकारी के आधार पर लोको पायलट को सतर्क करने के साथ जरूरत पड़ने पर ब्रेकिंग प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकती है। लाल सिग्नल के बावजूद ट्रेन आगे बढ़ने या निर्धारित गति सीमा पार करने की स्थिति में यह तकनीक दुर्घटना की आशंका कम करने में सहायक होती है। कवच प्रणाली का प्रमुख उद्देश्य ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने में सहायता करना है। यदि एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आमने-सामने आने या पीछे चल रही ट्रेन के आगे वाली ट्रेन के बहुत करीब पहुंचने जैसी खतरनाक स्थिति पैदा होती है, तो सिस्टम उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर चेतावनी और स्वचालित ब्रेकिंग के जरिए जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।
सर्दियों में कोहरे और कम दृश्यता के कारण रेल परिचालन में चुनौतियां बढ़ जाती हैं। ऐसी परिस्थितियों में केवल आंखों से ट्रैक और सिग्नल देखकर ट्रेन चलाना मुश्किल हो सकता है। कवच प्रणाली तकनीकी सूचनाओं के आधार पर लोको पायलट की सहायता करती है, जिससे सुरक्षित परिचालन को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, यह तकनीक मानवीय सतर्कता और रेलवे के निर्धारित सुरक्षा नियमों का विकल्प नहीं है। छिंदवाड़ा–आमला रेलखंड पर कवच प्रणाली के परीक्षण और इसके परिचालन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेल सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।




