झारखंड के जमशेदपुर के पास चांडिल के रहने वाले मोहम्मद आरिफ इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। लोग उन्हें अब उनके असली नाम से कम और ‘टार्जन’ के नाम से ज्यादा जानते हैं। वजह है उनकी बनाई हुई खास कार, जो दिखने में महंगी सुपरकार लैंबॉर्गिनी एवेंटाडोर जैसी नजर आती है, लेकिन असल में यह एक पुरानी मारुति 800 है।
बचपन का सपना बना पहचान
सालों पहले आई फिल्म “टार्जन: द वंडर कार” ने कई बच्चों के दिल में खास कार बनाने का सपना जगाया था। आरिफ भी उन्हीं में से एक थे। उस फिल्म का असर इतना गहरा रहा कि उन्होंने अपने नाम के साथ ही टार्जन जोड़ लिया। बीते करीब 10 साल से वह गैराज में मैकेनिक का काम कर रहे हैं। उनके मन में हमेशा अपनी खुद की टार्जन कार बनाने की चाह रही।
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2 साल की मेहनत, छोटे गैराज में बड़ा काम
करीब दो साल पहले आरिफ ने इस सपने को हकीकत में बदलने का फैसला किया। उन्होंने एक पुरानी मारुति 800 खरीदी और उसे पूरी तरह नए रूप में ढालने की शुरुआत की। किसी बड़ी कंपनी या आधुनिक वर्कशॉप की मदद नहीं ली गई। अपने छोटे से गैराज में उन्होंने खुद डिजाइन तैयार किया।
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कटिंग, वेल्डिंग, बॉडी शेप, पेंटिंग और फिनिशिंग तक का काम उन्होंने अपने हाथों से किया। कुछ जरूरी चीजें जैसे म्यूजिक सिस्टम, एलईडी लाइट्स और फ्रंट ग्लास बाहर से मंगाए गए। बाकी पूरा ढांचा उनकी मेहनत का नतीजा है।
सुपरकार जैसा लुक और फीचर्स
यह कार जब सड़क पर निकलती है तो लोग रुककर देखने लगते हैं। इसकी बॉडी शार्प और लो प्रोफाइल है, जो लैंबॉर्गिनी एवेंटाडोर की याद दिलाती है।

कार में दो सीटों की स्पोर्टी कॉन्फ़िगरेशन दी गई है। 16 इंच के चौड़े एलॉय व्हील्स लगाए गए हैं। स्टार्ट करते ही एग्जॉस्ट की आवाज सुपरकार जैसी सुनाई देती है।
इसके अलावा सनरूफ, रिमोट लॉक सिस्टम और हाई-फाई म्यूजिक सिस्टम जैसे फीचर्स भी जोड़े गए हैं। सीमित संसाधनों में तैयार की गई यह कार लोगों को हैरान कर रही है।
सोशल मीडिया पर मिल रहे लाखों व्यूज
03 मार्च 2026 तक उपलब्ध सोशल मीडिया ट्रेंड्स के अनुसार, आरिफ की कार से जुड़ी रील्स और वीडियो लाखों व्यूज हासिल कर चुके हैं। कई ऑटोमोबाइल पेज और कंटेंट क्रिएटर्स भी इस कार को शेयर कर रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग चांडिल पहुंचकर इस कार को देखने की इच्छा जता रहे हैं।

छोटे शहर से बड़ा संदेश
मोहम्मद आरिफ की कहानी यह बताती है कि हुनर डिग्री या बड़े शहर का मोहताज नहीं होता। अगर इरादा मजबूत हो तो सीमित साधनों में भी बड़ा काम किया जा सकता है।
एक साधारण मैकेनिक ने अपने जुनून और मेहनत से यह साबित किया है कि सपने देखने के लिए पैसे नहीं, हौसले की जरूरत होती है। चांडिल का यह ‘टार्जन’ आज झारखंड ही नहीं, पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।





