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Ramadan 2026 : ज़कात क्या है? रमजान में ज़कात क्यों दी जाती है और इसका असली मकसद क्या है?

रमज़ान में जकात देना इस्लाम का महत्वपूर्ण फर्ज है। जानिए जकात क्या है, किसे दी जाती है, कब देना जरूरी है और इसका समाज में क्या महत्व है। पूरी जानकारी सरल हिंदी में।

Shabana Parveen

Editor | Updated: 21 Feb 2026, 07:06 PM IST | 1 min read
Ramadan 2026 : ज़कात क्या है? रमजान में ज़कात क्यों दी जाती है और इसका असली मकसद क्या है?
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Ramadan 2026 : इस्लाम धर्म में जकात को पांच अहम स्तंभों में से एक माना जाता है। नमाज, रोजा, कलमा और हज की तरह ज़कात भी एक धार्मिक जिम्मेदारी है। यह एक तरह की अनिवार्य दान व्यवस्था है, जिसे आर्थिक रूप से सक्षम मुसलमानों के लिए देना जरूरी होता है। खासतौर पर रमजान के महीने में ज़कात देने का महत्व और बढ़ जाता है।

ज़कात का मूल अर्थ होता है “पवित्र करना” और “वृद्धि करना”। इस्लामिक मान्यता के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपनी कमाई का एक हिस्सा जरूरतमंदों को देता है, तो उसकी संपत्ति पवित्र होती है और उसमें बरकत आती है। यह सिर्फ दान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और धार्मिक कर्तव्य है।

ज़कात किसे और कितनी दी जाती है?

इस्लामिक नियमों के अनुसार, जिस व्यक्ति के पास एक निश्चित सीमा से अधिक संपत्ति हो, उसे साल में एक बार ज़कात देना जरूरी होता है। आम तौर पर कुल बचत और संपत्ति का 2.5 प्रतिशत हिस्सा ज़कात के रूप में दिया जाता है।

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ज़कात गरीबों, जरूरतमंदों, अनाथों, विधवाओं, कर्जदारों और समाज के कमजोर वर्गों को दी जाती है। इसका उद्देश्य समाज में आर्थिक संतुलन बनाना और गरीबों की मदद करना है।

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Ramadan 2026 : ज़कात क्या है? रमजान में ज़कात क्यों दी जाती है और इसका असली मकसद क्या है?

रमज़ान में ज़कात देने का महत्व

हालांकि ज़कात साल में कभी भी दी जा सकती है, लेकिन अधिकतर मुसलमान रमज़ान के महीने में ज़कात देना पसंद करते हैं। इसका कारण यह है कि रमज़ान को रहमत और बरकत का महीना माना जाता है। इस महीने में किए गए अच्छे कामों का सवाब कई गुना ज्यादा मिलता है।

रमज़ान में ज़कात देने से गरीब और जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशियों में शामिल हो पाते हैं। इससे समाज में भाईचारा, समानता और सहानुभूति की भावना मजबूत होती है।

Ramadan 2026 : ज़कात क्या है? रमजान में ज़कात क्यों दी जाती है और इसका असली मकसद क्या है?

ज़कात का असली उद्देश्य क्या है

ज़कात का मुख्य उद्देश्य समाज से गरीबी को कम करना और आर्थिक असमानता को संतुलित करना है। यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें अमीर लोग अपनी संपत्ति का हिस्सा गरीबों के साथ साझा करते हैं।

इसके अलावा ज़कात देने से व्यक्ति में दया, विनम्रता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। यह समाज में एक मजबूत और संतुलित आर्थिक ढांचा बनाने में भी मदद करती है।

रमज़ान और ज़कात का सामाजिक महत्व

रमज़ान के दौरान ज़कात और दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह न केवल धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि समाज को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। ज़कात के जरिए जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहारा मिलता है और समाज में समानता का संदेश जाता है।

इस तरह ज़कात इस्लाम की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य सिर्फ दान देना नहीं, बल्कि समाज में न्याय, समानता और भाईचारा स्थापित करना है।

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