Shab-e-Qadr 2026 : रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए इबादत, रोज़ा और रहमत का महीना माना जाता है। इसी पाक महीने में एक खास रात आती है जिसे शब-ए-कद्र कहा जाता है। इस रात को इस्लाम में बेहद मुकद्दस माना गया है और इसे हजार महीनों से बेहतर बताया गया है। शब-ए-कद्र का अंदाजन वक़्त रमज़ान के आखिरी दस दिनों में माना जा रहा है।
शब-ए-कद्र का क्या मतलब होता है
अरबी ज़बान में “लैलतुल कद्र” या “शब-ए-कद्र” का मतलब होता है ताकत, फैसला या बरकत की रात। इस्लाम के मुताबिक इसी रात अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रील के जरिए पैगंबर हजरत मोहम्मद को पहली बार कुरआन की आयतें उतारी थीं।
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कुरआन की सूरह “अल-कद्र” में बताया गया है कि यह रात हजार महीनों से बेहतर है। इसलिए मुसलमान इस रात को खास इबादत, नमाज और दुआ में बिताने की कोशिश करते हैं।
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रमज़ान के आखिरी दस दिनों में आती है यह रात
इस्लामी जानकारों के मुताबिक शब-ए-कद्र रमज़ान के आखिरी दस दिनों में आती है। खास तौर पर 21, 23, 25, 27 या 29वीं रात में इसे तलाश करने की सलाह दी जाती है।
हालांकि आम तौर पर दुनिया के कई हिस्सों में इसे 27वीं रमज़ान की रात माना जाता है, लेकिन इसकी सही रात तय नहीं बताई गई है।

इस रात मुसलमान क्या करते हैं
शब-ए-कद्र की रात मुसलमान पूरी रात जागकर इबादत करते हैं। मस्जिदों में खास नमाज पढ़ी जाती है और लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस रात आम तौर पर लोग,
- कुरआन की तिलावत करते हैं
- नफ्ल नमाज पढ़ते हैं
- दुआ और इस्तगफार करते हैं
- जरूरतमंदों को दान देते हैं
ऐसा माना जाता है कि इस रात की गई इबादत का सवाब हजार महीनों की इबादत से भी ज्यादा मिलता है।

क्यों खास मानी जाती है शब-ए-कद्र
इस्लाम में शब-ए-कद्र को रहमत और मगफिरत की रात कहा गया है। माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों की दुआएं ज्यादा कबूल करता है और फरिश्ते ज़मीन पर उतरते हैं।
इसी वजह से रमज़ान के आखिरी दस दिन मुसलमानों के लिए सबसे ज्यादा अहम माने जाते हैं और लोग इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की कोशिश करते हैं।





