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Ramadan 2026 : पहला अशरा पूरा, जानिए अशरा क्या होता है और रमज़ान में कितने अशरे होते हैं

रमज़ान 2026 का पहला अशरा मुकम्मल हो चुका है। जानिए अशरा क्या होता है, रमज़ान में कितने अशरे होते हैं और हर अशरे का इस्लाम में क्या अहमियत है। पूरी जानकारी आसान भाषा में पढ़ें।

Shabana Parveen

Editor | Updated: 28 Feb 2026, 08:23 PM IST | 1 min read
Ramadan 2026 : पहला अशरा पूरा, जानिए अशरा क्या होता है और रमज़ान में कितने अशरे होते हैं
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रमज़ान 2026 का पहला अशरा अब मुकम्मल हो चुका है। भारत समेत दुनिया भर के मुस्लिम कौम के लोग इस पाक महीने में रोजा रखकर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। रमजान का महीना रहमत, मगफिरत और जहन्नम से निजात का महीना माना जाता है। इस महीने को तीन बराबर हिस्सों में बांटा गया है, जिन्हें अशरा कहा जाता है।

इस वक़्त रमज़ान का दूसरा अशरा शुरू हो चुका है, जिसे ‘मगफिरत’ यानी गुनाहों की माफी का माना जाता है। इस दौरान लोग ज्यादा से ज्यादा इबादत, दुआ और तौबा करते हैं।

अशरा क्या होता है

अशरा अरबी ज़बान का लफ्ज़ है, जिसका मतलब होता है “दस दिन”। रमज़ान का महीना आमतौर पर 29 या 30 दिनों का होता है और इसे तीन अशरों में बांटा जाता है। हर अशरा 10 दिनों का होता है और हर अशरे का अलग अहमियत और मक़सद होता है।इस्लाम के मुताबिक, हर अशरा मुसलमानों को अल्लाह के करीब आने का एक खास मौका देता है।

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Ramadan 2026 : पहला अशरा पूरा, जानिए अशरा क्या होता है और रमज़ान में  कितने अशरे होते हैं

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रमज़ान में कितने अशरे होते हैं

रमज़ान में तीन अशरे होते हैं

1. पहला अशरा – रहमत का अशरा (पहले 10 दिन)

पहले अशरे को ‘रहमत का अशरा’ कहा जाता है। इसका मतलब है अल्लाह की रहमत यानी कृपा। इस दौरान रोजेदार अल्लाह से रहमत और बरकत की दुआ करते हैं। माना जाता है कि इस वक़्त अल्लाह अपने बंदों पर ख़ास रहमत करता है।

2. दूसरा अशरा – मगफिरत का अशरा (11वें से 20वें दिन)

दूसरे अशरे को ‘मगफिरत का अशरा’ कहा जाता है। इसका मतलब है गुनाहों की माफी। इस दौरान लोग अपने पिछले गुनाहों के लिए अल्लाह से माफी मांगते हैं और तौबा करते हैं। यह वक़्त खुद की बेहतरी और अल्लाह की तरफ लौटने का सबसे अच्छा मौका माना जाता है।

3. तीसरा अशरा – जहन्नम से निजात का अशरा (21वें से आखिरी दिन)

तीसरे अशरे को ‘जहन्नम से निजात का अशरा’ कहा जाता है। इसका मतलब है जहन्नम की आग से बचने की दुआ करना। इस दौरान शबे कद्र भी आती है, जिसे इस्लाम में सबसे पाक रात माना गया है। इस रात की इबादत हजार महीनों की इबादत से बेहतर मानी जाती है।

Ramadan 2026 : पहला अशरा पूरा, जानिए अशरा क्या होता है और रमज़ान में  कितने अशरे होते हैं

रमज़ान में अशरों की अहमियत क्यों है

रमज़ान के तीनों अशरे मुसलमानों के लिए रूहानी बेहतरी का पूरा मौका देते हैं। पहला अशरा रहमत के लिए, दूसरा माफी के लिए और तीसरा जहन्नम से बचने के लिए होता है।

इस वक़्त रोजेदार नमाज, कुरान पढ़ना, खैरात करना और जरूरतमंदों की मदद करना ज्यादा करते हैं। इससे इंसान का दिल साफ होता है और अल्लाह की रहमत मिलती है।

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