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ज़कात किसे देनी चाहिए और कितनी देनी चाहिए? जानिए 2026 के नए नियम, निसाब और सही तरीका

ज़कात किसे देना चाहिए और कितनी देना जरूरी है? 2026 में निसाब की नई सीमा, जकात का प्रतिशत और सही तरीके से जकात देने की पूरी जानकारी सरल हिंदी में पढ़ें।

Shabana Parveen

Editor | Updated: 26 Feb 2026, 11:24 AM IST | 1 min read
ज़कात किसे देनी चाहिए और कितनी देनी चाहिए? जानिए 2026 के नए नियम, निसाब और सही तरीका
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ज़कात को इस्लाम में बहुत अहम फर्ज माना गया है। यह सिर्फ दान नहीं, बल्कि एक मज़हबी जिम्मेदारी है। हर साल रमज़ान के दौरान लाखों मुसलमान अपनी ज़कात अदा करते हैं, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद हो सके।

ज़कात देने का असूल साफ है कि अगर किसी मुसलमान के पास एक तय हद से ज़्यादा दौलत है, तो उसे अपनी दौलत का 2.5% हिस्सा ज़कात के तौर में देना जरूरी होता है।

ज़कात देने के लिए कितनी संपत्ति होना जरूरी है (निसाब)

ज़कात तभी फर्ज होती है जब किसी शख्स की तमाम बचत और दौलत “निसाब” से ज्यादा हो। निसाब सोना या चांदी की कीमत के बुनियाद पर तय होता है, जो 87.48 ग्राम सोना या 612.36 ग्राम चांदी के बराबर होता है।

भारत में 2026 के मुताबिक चांदी के हिसाब से निसाब कम-अज-कम 57,000 रुपये के करीब है। इसका मतलब है कि अगर किसी शख्स की तमाम बचत इससे ज्यादा है, तो उस पर ज़कात देना जरूरी हो जाता है।

ज़कात साल में एक बार दी जाती है, जब दौलत निसाब से ऊपर रहे और उस पर एक पूरा इस्लामी साल गुजर जाए।

ज़कात किसे देनी चाहिए और कितनी देनी चाहिए? जानिए 2026 के नए नियम, निसाब और सही तरीका

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ज़कात कितनी देनी होती है?

ज़कात की दर तय है। शख्स को अपनी तमाम बचत, नकद, बैंक बैलेंस, सोना, चांदी और कारोबारी माल का 2.5% ज़कात के तौर पर में देना होता है।

मिसाल के तौर पर 

  • अगर आपके पास 1,00,000 रुपये बचत है, तो ज़कात होगी,
    2,500 रुपये
  • अगर आपके पास 5,00,000 रुपये बचत है, तो ज़कात होगी,
    12,500 रुपये

यह रकम सिर्फ बचत और एक्स्ट्रा दौलत पर दी जाती है, जरूरी खर्च और कर्ज घटाने के बाद।

ज़कात किसे देनी चाहिए और कितनी देनी चाहिए? जानिए 2026 के नए नियम, निसाब और सही तरीका

ज़कात किन लोगों को दी जा सकती है?

कुरान में ज़कात पाने के लिए आठ किस्म के लोगों का जिक्र किया गया है। इनमें ख़ास तौर पर शामिल हैं:

  • गरीब लोग
  • जरूरतमंद लोग
  • कर्ज में डूबे लोग
  • मुसाफिर या फंसे हुए मुसाफिर
  • नए मुसलमान
  • ज़कात का काम करने वाले लोग
  • गुलामों को आजाद कराने के लिए
  • अल्लाह के रास्ते में काम करने वाले लोग

सबसे ज्यादा तरज़ीह गरीब और जरूरतमंद लोगों को दी जाती है।

किन चीजों पर ज़कात देना जरूरी है?

इन चीजों पर ज़कात देना जरूरी होता है,

  • बैंक में जमा पैसा
  • नकद रकम
  • सोना और चांदी
  • कारोबार से जुड़ा माल
  • निवेश और शेयर

अगर इन तमाम की टोटल वैल्यू निसाब से ज्यादा है, तो ज़कात देना जरूरी होता है।

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रमजान में ज़कात देने की खास अहमियत

हालांकि ज़कात साल में कभी भी दी जा सकती है, लेकिन रमजान में ज़कात देने की ख़ास अहमियत है। इस महीने में ज़कात देने का सवाब ज़्यादा होता है और इससे गरीब लोगों को ईद से पहले मदद मिलती है।

ज़कात इस्लाम का एक अहम पिलर है, जो समाज में बराबरी और मदद के एहसास को मजबूत करता है। अगर आपकी दौलत निसाब से ज्यादा है, तो आपको हर साल अपनी दौलत का 2.5% ज़कात देना जरूरी है।

सही शख्स को ज़कात देना भी उतना ही जरूरी है, ताकि यह असल में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे और उनकी  ज़िन्दगी बेहतर बन सके।

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