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सिंगरौली में हुआ 39700/- रूपये का AEPS Fraud, पढ़िए कैसे मिला वापस ?

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 07 Jan 2026, 08:42 AM IST | 1 min read
सिंगरौली में हुआ 39700/- रूपये का AEPS Fraud
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सिंगरौली, AEPS Fraud से कैसे बचें ?। Digital banking के दौर में साइबर अपराध (Cyber ​​crimes) के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, लेकिन समय पर जागरूकता और त्वरित कार्रवाई से नुकसान की भरपाई भी संभव है। इसका ताजा उदाहरण सिंगरौली जिले (Singrauli District) में सामने आया, जहां बैंक और साइबर सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित प्रयास से  AEPS (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) के जरिए ठगे गए पैसे खाताधारकों को वापस मिल गए।

बैक खाते में धोखाधड़ी होने पर तुरंत सायबर सिक्योरिटी टोल फ्री नंबर-1930 कराये अवगत

जिले के अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) द्वारा बैंक खाताधारकों को साइबर फ्रॉड से सतर्क रहने की अपील करते हुए एक महत्वपूर्ण मामला साझा किया। बताया गया कि ग्राम कर्सुआलाल निवासी विगत वर्ष खाता धारक मैनामति गुप्ता पत्नी शिव कुमार गुप्ता ग्राम कर्सुआलाल का खाता मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक शाखा कर्सुआलाल के ग्राहक है ।जिसके खाते से दिनांक 29.09.2025, 01.10.2025 एवं 13.10.2025 को कुल राशि- 39700/- रूपये । AEPS (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) के माध्यम से किसी अज्ञात व्य.क्ति ने धोखाधडी कर आहरित (निकासी) कर लिया था ।

घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित खाताधारक ने बिना देरी किए बैंक, साइबर सुरक्षा विभाग और स्थानीय थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत समय पर होने के कारण साइबर सुरक्षा टीम और बैंक के संयुक्त प्रयासों से 2 दिसंबर 2025 को पूरी राशि खाताधारक के खाते में वापस जमा कर दी गई।

https://urjanchaltiger.in/news/singrauli-drinking-water-quality-control-room-2026/193868/

इसी तरह, उसी बैंक शाखा के एक अन्य ग्राहक के साथ भी AEPS Fraud की घटना हुई थी। उनके खाते से भी धोखाधड़ी कर राशि निकाली गई थी, लेकिन उन्होंने भी तुरंत बैंक, साइबर सेल और थाना में शिकायत दर्ज कराई। नतीजतन, इस मामले में भी पूरी राशि वापस मिल गई।

इन मामलों से स्पष्ट है कि देरी नहीं, त्वरित कार्रवाई ही सबसे बड़ा बचाव है। जिला प्रशासन और बैंक अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिले तो सबसे पहले साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। इसके साथ ही नजदीकी थाना में ऑनलाइन या ऑफलाइन एफआईआर दर्ज कराकर उसकी प्रति संबंधित बैंक शाखा में जमा कराएं, ताकि बैंक आगे की आवश्यक कार्रवाई कर सके।

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विशेषज्ञों का कहना है कि घटना के तुरंत बाद शिकायत करने पर धनराशि के वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। एईपीएस और डिजिटल ट्रांजैक्शन का उपयोग करते समय बायोमेट्रिक जानकारी, ओटीपी और व्यक्तिगत विवरण किसी के साथ साझा न करें।

साइबर सुरक्षा के प्रति सजग रहकर और सही समय पर कदम उठाकर न केवल अपनी मेहनत की कमाई को बचाया जा सकता है, बल्कि साइबर अपराधियों के मंसूबों को भी नाकाम किया जा सकता है।

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