सिंगरौली। जिले के बंधा कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। जमीन अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास को लेकर पहले से चल रहे असंतोष के बीच अब किसानों ने एक नया और गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि रात के समय खेतों में कथित रूप से दवा का छिड़काव किया गया, जिससे उनकी खड़ी फसल प्रभावित हुई। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रात में खेतों में दवा छिड़कने का आरोप
प्रभावित किसानों का कहना है कि कंपनी से जुड़े सुरक्षा कर्मियों ने कथित तौर पर रात के अंधेरे में खेतों में दवा का छिड़काव किया। उनका आरोप है कि इससे फसल को नुकसान पहुंचा है।
Also Read
किसानों के लिए यह केवल फसल का नुकसान नहीं, बल्कि आजीविका पर सीधा असर है। एक सीजन की फसल खराब होने से पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
Read Today's E-Magazine
Swipe through the complete digital edition of Urjanchal Tiger right on your screen.
जांच की मांग तेज
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि:
- खेतों का मौके पर निरीक्षण किया जाए
- फसल नुकसान का आकलन कराया जाए
- मिट्टी और पौधों के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए
फिलहाल यह आरोप ग्रामीणों की ओर से लगाए गए हैं और सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
मुआवजा और पुनर्वास पर पुराना विवाद
बंधा कोल ब्लॉक को लेकर जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास का मुद्दा पहले से ही विवादों में रहा है। यह परियोजना बंधा, तेंदुहा, पिडरवाह, देवरी और पचौर गांवों की जमीन को प्रभावित करती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि:
- कई परिवारों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला
- पुनर्वास से जुड़े मुद्दे लंबित हैं
- बिना पूर्ण समाधान के खनन गतिविधियां आगे बढ़ाई जा रही हैं।
पहले भी हो चुका है विरोध
स्थानीय ग्रामीण पहले भी अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। उनका कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन:
- जमीन के बदले उचित मुआवजा
- सुरक्षित पुनर्वास
- आजीविका की गारंटी
इन सभी को पहले सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
हजारों लोगों की जिंदगी से जुड़ा मामला
बंधा कोल ब्लॉक लगभग 1850.94 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली परियोजना है, जिसकी उत्पादन क्षमता करीब 5 मिलियन टन प्रति वर्ष प्रस्तावित है। इसमें निजी भूमि के साथ वन क्षेत्र भी शामिल है।
इस कारण यह मामला केवल खनन परियोजना तक सीमित नहीं, बल्कि स्थानीय आबादी, खेती और पर्यावरण से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।





