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सावन 2025 की शुरुआत : शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, जानिए हरे रंग की परंपरा का रहस्य

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 12 Jul 2025, 08:31 PM IST | 1 min read
sawan 2025
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भोपाल/वाराणसी/नई दिल्ली, 12 जुलाई 2025 : बारिश की पहली फुहारों के साथ ही आज से सावन का पवित्र महीना पूरे देश में धूमधाम से शुरू हो गया। शिवालयों में सुबह से ही ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों की गूंज सुनाई दी और भक्तों की भारी भीड़ ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पुण्य अर्जित किया। सावन का यह महीना 11 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगा, जिसमें हर सोमवार को विशेष ‘सावन सोमवार व्रत’ रखा जाएगा।

शिवभक्ति का महापर्व

सावन, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है, हिन्दू पंचांग के अनुसार भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन महीना माना जाता है। मान्यता है कि इसी महीने समुद्र मंथन के दौरान निकले विष (हलाहल) को भगवान शिव ने ग्रहण कर सृष्टि की रक्षा की थी, जिससे उन्हें ‘नीलकंठ’ कहा गया। इस दौरान महिलाएं और कुंवारी कन्याएं व्रत रखती हैं, शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, दूध, और श्वेत पुष्प अर्पित करती हैं, जिससे घर में सुख-शांति और सौभाग्य बना रहे।

हरे रंग की परंपरा का वैज्ञानिक और धार्मिक रहस्य

सावन में हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि गहरा धार्मिक और मनोवैज्ञानिक महत्व भी रखता है।

धार्मिक दृष्टि से, हरा रंग प्रकृति, हरियाली और जीवन का प्रतीक है, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। सुहागिन महिलाएं हरे वस्त्र पहनकर माता पार्वती से अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। वहीं, अविवाहित लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए हरे रंग का श्रृंगार करती हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हरा रंग बुध ग्रह से जुड़ा है, जो बुद्धि, व्यापार और करियर में वृद्धि करता है।

वैज्ञानिक कारणों में, मानसून की हरियाली आंखों को ठंडक और मन को शांति देती है। रंगों के मनोविज्ञान में हरा रंग संतुलन, सकारात्मक ऊर्जा और तनाव कम करने के लिए जाना जाता है।

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सावन के पर्व और उत्सव

इस महीने में रक्षाबंधन, हरियाली तीज, नागपंचमी, श्रावण पूर्णिमा, वरलक्ष्मी व्रत और जन्माष्टमी जैसे कई बड़े त्योहार भी मनाए जाएंगे। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और कांवड़ यात्रा की धूम पूरे महीने देखने को मिलेगी।

सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश

सावन न केवल आध्यात्मिक, बल्कि प्रकृति और कृषि के लिए भी महत्वपूर्ण है। बारिश से धरती हरी-भरी हो जाती है, जिससे किसानों की फसलें लहलहा उठती हैं और समाज में नई ऊर्जा का संचार होता है।