झारखंड के किसानों ने वाराणसी में सीखी टिकाऊ खेती की नई राह, आईआरआरआई – आइसार्क का शैक्षणिक भ्रमण – Urjanchal Tiger
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झारखंड के किसानों ने वाराणसी में सीखी टिकाऊ खेती की नई राह, आईआरआरआई – आइसार्क का शैक्षणिक भ्रमण

अजीत नारायण सिंह

Author | Updated: 15 Jan 2026, 07:49 PM IST | 1 min read
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वाराणसी ।। झारखंड के चतरा जिले से आए 13 प्रगतिशील किसानों के दल ने गुरुवार को वाराणसी स्थित अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र आईआरआरआई–आइसार्क का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, संसाधन-सक्षम उपायों और जलवायु-अनुकूल खेती की व्यवहारिक जानकारी दी गई, जिससे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके।

यह शैक्षणिक भ्रमण कृषि विज्ञान केंद्र, वाराणसी के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य राज्यों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान कर किसानों की तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करना रहा। समन्वय केवीके प्रमुख डॉ. एन.के. सिंह द्वारा किया गया।

आइसार्क के वैज्ञानिकों ने बताया कि ऐसे भ्रमण किसानों को वैज्ञानिक नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे उत्पादन लागत में कमी और उपज में स्थिर वृद्धि संभव होती है। वैज्ञानिकों ने देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों और किसान समूहों के साथ दीर्घकालिक सहयोग को भविष्य की खेती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

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भ्रमण के दौरान किसानों ने यंत्रीकरण हब, रिजेनरेटिव कृषि के प्रदर्शन प्लॉट और धान की उन्नत खेती से जुड़े अनुसंधान कार्यों का अवलोकन किया। उन्हें मशीनों के प्रभावी उपयोग, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल प्रबंधन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़ी तकनीकों की प्रत्यक्ष जानकारी मिली।

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झारखंड से आए किसानों ने इस पहल को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि वे यहां सीखी गई वैज्ञानिक पद्धतियों को अपने गांवों और खेतों में लागू करेंगे। वैज्ञानिकों से सीधा संवाद और प्रयोगों को नजदीक से देखने का अनुभव उनके लिए प्रेरणादायक रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

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