Urjanchal Tiger
शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 |

No Live TV Stream Available

Please check back later.

पोस्ट ऑफिस में ₹36.4 लाख की धोखाधड़ी, जानिए जमाकर्ताओं का पैसे वापस मिलेगा या नहीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बीना डाकघर (Bina Post Office) में फर्जी राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) और टर्म डिपॉजिट से जुड़े करीब 36.4 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 31 Oct 2026, 07:22 PM IST | 1 min read
Share:

भोपाल/जबलपुर, 31 अक्टूबर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बीना डाकघर (Bina Post Office) में फर्जी राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) और टर्म डिपॉजिट से जुड़े करीब 36.4 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। न्यायमूर्ति मनिंदर एस. भट्टी ने 15 अक्टूबर 2026 को दिए आदेश में कहा कि प्रभावित जमाकर्ताओं को निर्धारित प्रारूप में आवेदन जमा करने के लिए 30 कार्यदिवस का समय दिया जाए। सक्षम प्राधिकारी को आवेदन प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर उन पर कार्रवाई करनी होगी।

क्या है करीब 36.4 लाख रु की धोखाधड़ी का मामला पूरा मामला?

बीना डाकघर (Bina Post Office) में राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र और टर्म डिपॉजिट खाते खुलवाने पहुंचे कुछ जमाकर्ताओं को डाक विभाग के कर्मचारियों ने काउंटर तक पहुंचने से पहले संपर्क किया। उन्होंने खाता खोलने के लिए फॉर्म भरने में सहायता की और निवेश के नाम पर उनसे रकम प्राप्त की।

इसके बाद जमाकर्ताओं को पासबुक और अन्य दस्तावेज दिए गए। बाद में जांच में सामने आया कि संबंधित दस्तावेज फर्जी थे और उनके नाम पर वास्तविक खाते खोले ही नहीं गए थे। इस तरह जमाकर्ताओं को करीब 36.4 लाख रुपये का नुकसान हुआ।

मामले में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें दोषी ठहराया गया और जेल भेजा गया। इसके बावजूद डाक विभाग ने प्रभावित जमाकर्ताओं की रकम लौटाने के दावों को स्वीकार नहीं किया था।

डाक विभाग ने क्यों ठुकराए दावे?

डाक विभाग का तर्क था कि संबंधित कर्मचारी विभाग में कार्यरत थे, लेकिन धोखाधड़ी के समय बीना डाकघर में पदस्थ नहीं थे। विभाग के अनुसार, जमाकर्ताओं को अधिकृत काउंटर पर जाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत निवेश करना चाहिए था।

जमाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रविंद्र सिंह अहिरवार ने अदालत में दलील दी कि संबंधित व्यक्तियों के डाक विभाग के कर्मचारी होने में विवाद नहीं था। वे डाकघर परिसर में मौजूद थे और ग्राहकों को खाता खोलने की प्रक्रिया में मदद कर रहे थे।

Advertisement

ऐसी स्थिति में आम जमाकर्ताओं से यह अपेक्षा करना उचित नहीं था कि वे कर्मचारियों की पदस्थापना या स्थानांतरण से जुड़ी आंतरिक जानकारी की जांच करें। याचिकाकर्ताओं ने विभाग की जिम्मेदारी तय करने और अपनी रकम वापस दिलाने की मांग की।

अदालत का निर्देश

न्यायमूर्ति मनिंदर एस. भट्टी ने मामले के रिकॉर्ड की समीक्षा करते हुए कहा कि जमाकर्ताओं का संपर्क ऐसे व्यक्तियों से हुआ था, जो डाक विभाग के कर्मचारी थे। जमाकर्ताओं को यह जानकारी नहीं थी कि संबंधित कर्मचारी उस समय बीना शाखा में पदस्थ थे या नहीं। अदालत ने कहा कि उनसे इस आंतरिक प्रशासनिक जानकारी की जानकारी होने की अपेक्षा भी नहीं की जा सकती।

अदालत के अनुसार, जब जमाकर्ताओं ने सद्भावना से डाकघर में मौजूद कर्मचारियों के माध्यम से खाते खुलवाने और निवेश करने का प्रयास किया, तो केवल कर्मचारियों की संबंधित शाखा में पदस्थापना नहीं होने के आधार पर उनके दावों को खारिज करना उचित नहीं था।

हाईकोर्ट ने डाक विभाग के 27 मई 2021 के परिपत्र का भी उल्लेख किया। इस परिपत्र में ऐसे मामलों से निपटने की प्रक्रिया का प्रावधान है, जिनमें खाते वास्तव में खोले नहीं गए हों या फर्जी पासबुक जारी की गई हो।

अदालत ने निर्देश दिया कि प्रभावित जमाकर्ताओं के दावों पर इसी निर्धारित प्रक्रिया के तहत विचार किया जाए।

पीड़ितों को अब क्या करना होगा?

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, प्रभावित जमाकर्ताओं को डाक विभाग के 27 मई 2021 के परिपत्र के साथ निर्धारित प्रारूप में दावा आवेदन संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष जमा करना होगा।

आदेश में आवेदन जमा करने के लिए 30 कार्यदिवस की अवधि निर्धारित की गई है। आवेदन प्राप्त होने के बाद सक्षम प्राधिकारी को 90 दिनों के भीतर दावे पर कार्रवाई करनी होगी। अदालत ने यह भी कहा कि सावधि जमा पर लागू ब्याज का भुगतान कानून के अनुसार किया जाए।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आदेश में निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसलिए इसे बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के सभी प्रभावित जमाकर्ताओं को तत्काल भुगतान का आदेश मानना सही नहीं होगा।

जमाकर्ताओं के लिए क्या है जरूरी ?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, डाकघर में निवेश करने वाले ग्राहकों को निर्धारित काउंटर और आधिकारिक भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्हें पासबुक, जमा रसीद, खाता विवरण और अन्य आधिकारिक दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए।

इसके अलावा, समय-समय पर यह जांचना चाहिए कि जमा की गई रकम डाकघर के रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं। पासबुक और खाते के विवरण में अंतर मिलने पर संबंधित डाकघर में लिखित शिकायत दर्ज कर उसकी रसीद या अन्य प्रमाण सुरक्षित रखना चाहिए।

फर्जी पासबुक जारी होने या खाता वास्तव में नहीं खुलने की स्थिति में जमाकर्ता डाक विभाग के 27 मई 2021 के परिपत्र के तहत निर्धारित दावा प्रक्रिया का सहारा ले सकते हैं।

ADVERTISEMENT