भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ऑनलाइन ठगी (Digital Fraud) के मामलों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में 12 लाख से ज्यादा भारतीय ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हुए, जिसके बाद आम लोगों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इसी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड से पीड़ित ग्राहकों को राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की है। इसके तहत कुछ परिस्थितियों में ग्राहकों को आर्थिक मुआवजा मिल सकता है।
₹50 हजार तक के Digital Fraud पर मिल सकता है मुआवजा
नई व्यवस्था के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के साथ डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड होता है और नुकसान की राशि ₹50,000 तक है, तो उसे आंशिक मुआवजा मिल सकता है।
नियम के अनुसार:
- ₹50,000 तक के फ्रॉड को कवर किया जा सकता है
- ग्राहक को अधिकतम ₹25,000 तक मुआवजा मिल सकता है
- यह राशि नुकसान का लगभग 85 प्रतिशत तक हो सकती है
- यह सुविधा हर ग्राहक को जीवन में केवल एक बार दी जाएगी
इसका मकसद छोटे डिजिटल फ्रॉड के मामलों में पीड़ितों को तुरंत राहत देना है।
इन मामलों में बैंक को लौटाना होगा पूरा पैसा
कुछ स्थितियों में ग्राहकों को पूरा पैसा वापस भी मिल सकता है।
अगर डिजिटल फ्रॉड इन कारणों से हुआ हो:
- बैंक की लापरवाही या सुरक्षा में कमी
- बैंकिंग सिस्टम में तकनीकी खराबी
- किसी थर्ड पार्टी डेटा ब्रीच की वजह से
तो बैंक को ग्राहक की पूरी राशि वापस करनी पड़ सकती है।
ध्यान रखें : 5 दिन के अंदर करनी होगी शिकायत
डिजिटल फ्रॉड के मामलों में समय पर शिकायत करना बेहद जरूरी है।
मुआवजा पाने के लिए ग्राहक को
- 5 दिनों के भीतर अपने बैंक को जानकारी देनी होगी
- साथ ही राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या cybercrime portal पर शिकायत दर्ज करनी होगी
अगर तय समय सीमा के भीतर शिकायत नहीं की गई, तो मुआवजा मिलने में दिक्कत आ सकती है।
डिजिटल पेमेंट के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है और करोड़ों लोग रोजाना UPI, मोबाइल वॉलेट और नेट बैंकिंग का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन फ्रॉड से सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है।
जानकारों का मानना है कि डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए बैंक, पेमेंट प्लेटफॉर्म और यूजर्स,तीनों की सतर्कता जरूरी है।











