2022 मॉब लिंचिंग केस में बड़ा फैसला,14 दोषियों को उम्रकैद !

मध्य प्रदेश के सिवनी मालवा में 2022 के मॉब लिंचिंग मामले में अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसला आने के बाद कोर्ट परिसर में हंगामा हो गया।

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 13 Jun 2026, 08:37 PM IST | 1 min read
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मध्य प्रदेश के सिवनी मालवा में 2022 के मॉब लिंचिंग मामले में अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसला आने के बाद कोर्ट परिसर में हंगामा हो गया।

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा में वर्ष 2022 में कथित गो तस्करी के आरोप में हुई मॉब लिंचिंग मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। एडीजे कोर्ट ने 14 आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसले के बाद कोर्ट परिसर में परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस वाहन को रोकने का प्रयास किया।

चार साल पुराने मॉब लिंचिंग मामले में आया फैसला

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की सिवनी मालवा तहसील में वर्ष 2022 में हुई मॉब लिंचिंग की घटना में अदालत ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। एडीजे कोर्ट ने मामले में 14 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सभी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।

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यह मामला 3 अगस्त 2022 का है, जब महाराष्ट्र के अमरावती निवासी नजीर अहमद की कथित गो तस्करी के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

क्या था पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, नजीर अहमद पर गो तस्करी का आरोप लगाया गया था। आरोप है कि इसके बाद भीड़ ने उन्हें घेर लिया और मारपीट की, जिससे उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी माना।

सजा सुनते ही कोर्ट परिसर में हंगामा

अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर में भावुक माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फैसले के बाद दोषियों के परिजनों की चीख-पुकार सुनाई देने लगी।

जब पुलिस दोषियों को जेल ले जाने के लिए वाहन में बैठा रही थी, तब कुछ परिजनों ने विरोध शुरू कर दिया।

पुलिस वाहन के सामने लेट गए परिजन

बताया जा रहा है कि कुछ परिजन पुलिस वाहन के सामने लेट गए और दोषियों को जेल ले जाने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और परिजनों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।

हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए सभी दोषियों को सुरक्षित जेल भेज दिया।

परिजनों ने क्या कहा?

दोषियों के परिजनों का कहना है कि कुछ लोगों ने युवाओं को गौसेवा के नाम पर साथ ले जाया था, जिसके बाद यह घटना हुई। परिजनों ने फैसले पर असंतोष भी जताया।

हालांकि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर अपना निर्णय सुनाया है।

देश में मॉब लिंचिंग की घटनाएं समय-समय पर गंभीर सामाजिक और कानूनी बहस का विषय रही हैं। विभिन्न राज्यों में ऐसी घटनाओं पर अदालतें कड़ी टिप्पणी कर चुकी हैं और कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की आवश्यकता जताई जाती रही है।

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