सिंगरौली। मध्यप्रदेश सरकार ने ‘दो से अधिक संतान’ के नियम का उल्लंघन करने पर एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। कार्यालय महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, मध्यप्रदेश (भोपाल) द्वारा जारी आदेश के तहत सिंगरोली में पदस्थ उप पंजीयक (Sub-Registrar) अशोक सिंह परिहार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।
जाने क्या है पूरा मामला ?
शासकीय आदेश के अनुसार, श्री अशोक सिंह परिहार के विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के तहत विभागीय जांच चल रही थी। उन पर आरोप था कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीन संतानें हुईं। जांच में पाया गया कि उनकी तीसरी संतान (पुत्र अभिषेक सिंह) का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरोली द्वारा गठित संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर यह आरोप पूरी तरह प्रमाणित पाया गया।
नियम की जानकारी नहीं थी’ का बहाना खारिज
जांच के दौरान अपचारी अधिकारी श्री परिहार ने अपना पक्ष रखते हुए तर्क दिया था कि वे 1992 से सेवा में हैं और उन्हें तीसरी संतान से जुड़े इस नियम की कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, विभाग ने उनके इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
आदेश में स्पष्ट किया गया कि:- “यह स्वीकार योग्य नहीं है कि किसी शासकीय सेवक को उनके हित संबंधी किसी नियम की जानकारी न हो। मात्र नियम संज्ञान में न होने का तर्क आरोप को अप्रमाणित मानने हेतु पर्याप्त नहीं है।”
क्या कहता है मध्यप्रदेश शासन का नियम ?
मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) में 10 मार्च 2000 को प्रकाशित संसोधित नियम के अनुसार: कोई भी उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक जीवित संतानें हैं, जिनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके पश्चात हुआ हो, वह किसी भी शासकीय सेवा या पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। विभागीय जांच में दोष सिद्ध होने के बाद, महानिरीक्षक पंजीयन (मध्यप्रदेश) द्वारा 11 जून 2026 को आदेश (क्रमांक 157694/स्था.जांच/2026/88) जारी करते हुए श्री अशोक सिंह परिहार को मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 10(8) के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उक्त आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर सिंगरोली, उप महानिरीक्षक पंजीयन जबलपुर और जिला पंजीयक सिंगरोली को आवश्यक कार्रवाई और सेवा पुस्तिका में प्रविष्टि हेतु भेज दी गई है।







