क्या आपका PF पूरी तरह टैक्स-फ्री है? ITR फाइलिंग के दौरान EPF से जुड़ी 5 ऐसी गलतियां हैं जो आयकर विभाग की नजर में ला सकती हैं। जानिए जरूरी नियम।
ITR फाइलिंग सीजन के बीच EPF खाताधारकों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी सामने आई है। आयकर विभाग अब AIS (Annual Information Statement) और ITR का मिलान कर रहा है। ऐसे में PF निकासी, अधिक योगदान या पुराने खातों को ट्रांसफर न करने जैसी गलतियां टैक्स नोटिस का कारण बन सकती हैं। जानिए EPF से जुड़ी 5 महत्वपूर्ण बातें।
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क्या PF पूरी तरह टैक्स-फ्री है?
अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारी मानते हैं कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में जमा राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है और इस पर आयकर विभाग की कोई नजर नहीं रहती। लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।
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ITR फाइलिंग के दौरान आयकर विभाग अब आपके रिटर्न का मिलान AIS (Annual Information Statement) से करता है। ऐसे में EPF से जुड़ी कुछ लेन-देन आयकर विभाग की जांच का कारण बन सकती हैं।
1. पांच साल पूरे होने से पहले PF निकालना
यदि कोई कर्मचारी लगातार 5 वर्ष की सेवा पूरी किए बिना EPF राशि निकालता है, तो कुछ परिस्थितियों में यह निकासी कर योग्य (Taxable) हो सकती है।
ऐसी निकासी आयकर विभाग के रिकॉर्ड में दिखाई देती है और उसका विवरण ITR में सही तरीके से देना जरूरी होता है।
2. EPF में ₹2.5 लाख से अधिक योगदान
वर्तमान नियमों के अनुसार यदि कर्मचारी का वार्षिक EPF योगदान ₹2.5 लाख से अधिक हो जाता है, तो अतिरिक्त योगदान पर मिलने वाला ब्याज कर योग्य हो सकता है।
उच्च आय वर्ग के कर्मचारियों को इस नियम पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
3. नौकरी बदलने पर पुराना PF ट्रांसफर न करना
कई कर्मचारी नौकरी बदलने के बाद पुराने PF खाते को नए खाते से लिंक या ट्रांसफर नहीं करते।
इससे कई निष्क्रिय (Inactive) PF खाते बने रहते हैं, जो बाद में रिकॉर्ड मिलान के दौरान समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
4. ITR में EPF का उल्लेख न करना
कुछ लोग यह मानकर ITR में PF से संबंधित जानकारी नहीं देते कि यह पूरी तरह टैक्स-फ्री है।
विशेषज्ञों के अनुसार EPF से जुड़े लेन-देन का उचित खुलासा (Disclosure) करना महत्वपूर्ण है, ताकि AIS और ITR में अंतर न दिखाई दे।
5. AIS और PF रिकॉर्ड का मिलान न करना
ITR दाखिल करने से पहले AIS में उपलब्ध जानकारी और EPF खाते के रिकॉर्ड का मिलान करना आवश्यक है।
यदि दोनों में अंतर पाया जाता है, तो आयकर विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।
AIS क्या है ?
Annual Information Statement (AIS) आयकर विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया एक विस्तृत वित्तीय रिकॉर्ड है, जिसमें करदाता के विभिन्न वित्तीय लेन-देन की जानकारी दर्ज होती है।
ITR दाखिल करने से पहले AIS की समीक्षा करना अब बेहद जरूरी माना जा रहा है।



