सिंगरौली में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 के विरोध में नागरिकों द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में विधेयक के वर्तमान स्वरूप पर आपत्ति जताते हुए इसे पुनर्विचार के लिए वापस लेने की मांग की गई।
संवैधानिक प्रावधानों का दिया हवाला
ज्ञापनकर्ताओं ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को नीति-निर्देशक तत्व के रूप में रखा गया है, जबकि धार्मिक, सांस्कृतिक, निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े अधिकार मौलिक अधिकारों के अंतर्गत संरक्षित हैं।
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उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी व्यक्तिगत कानून में बड़े बदलाव से पहले सभी पक्षों से व्यापक चर्चा आवश्यक है।
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विवाह, तलाक और उत्तराधिकार कानूनों पर आपत्ति
ज्ञापन में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत और पारिवारिक कानूनों से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों पर चिंता जताई गई।
ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि भारत की विविधता को देखते हुए कानून में समानता के साथ-साथ सामाजिक संतुलन और संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण भी जरूरी है।
व्यापक परामर्श के बाद ही निर्णय की मांग
ज्ञापन में मांग की गई कि
- विधेयक को वर्तमान स्वरूप में वापस लिया जाए
- या इसके लागू होने पर रोक लगाई जाए
- सभी समुदायों और विधि विशेषज्ञों से विस्तृत परामर्श के बाद ही निर्णय लिया जाए

समुदाय-विशिष्ट कानूनों के संरक्षण की मांग
ज्ञापनकर्ताओं ने यह भी कहा कि जिस प्रकार जनजातीय समुदायों को उनके पारंपरिक कानूनों के आधार पर संरक्षण मिलता है, उसी प्रकार अन्य समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों के संदर्भ में भी संतुलित और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित
इस दौरान जुल्फिकार अली, उसैद हसन सिद्दीकी (एडवोकेट), मोहम्मद शाहिद खान रिंकू, अलाउद्दीन खान (एडवोकेट), असलम अंसारी (एडवोकेट), अनवर हुसैन अंसारी, मोहम्मद इरशाद, अब्दुल मजीद, अब्दुल्लाह, मोहम्मद रसूल, इरफान खान, जमालुद्दीन अंसारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
Frequently Asked Questions
समान नागरिक संहिता क्या है?
यह एक ऐसा प्रस्तावित कानून है जिसमें सभी नागरिकों के लिए समान व्यक्तिगत कानून लागू करने की बात कही जाती है।
सिंगरौली में ज्ञापन क्यों दिया गया?
विधेयक के वर्तमान स्वरूप का विरोध करते हुए व्यापक परामर्श की मांग के लिए।
ज्ञापन में मुख्य मांग क्या है?
विधेयक को वापस लेने या लागू करने से पहले सभी पक्षों से चर्चा करने की मांग।
क्या इस पर सरकार की प्रतिक्रिया आई है?
फिलहाल इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।





