सिंगरौली। नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित किया कि आपसी संवाद और समझौते के माध्यम से न्याय को सरल, त्वरित और मानवीय बनाया जा सकता है। शनिवार को जिला न्यायालय बैढ़न, देवसर एवं सरई में आयोजित नेशनल लोक अदालत में कुल 1905 प्रकरणों का सफल निराकरण किया गया, जिससे हजारों लोगों को वर्षों से चल रहे विवादों से राहत मिली।

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न्याय सिर्फ फैसलों से नहीं, बल्कि समाधान से मजबूत होता है—इस बात को नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर साबित कर दिया। शनिवार को जिला न्यायालय बैढ़न, देवसर एवं सरई में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 1905 प्रकरणों का आपसी सहमति से निराकरण हुआ, जिससे न्याय आमजन के और करीब पहुंचा। माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिंगरौली के अध्यक्ष श्री अतुल कुमार खंडेलवाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस लोक अदालत में 20 न्यायिक खंडपीठों ने सक्रिय भूमिका निभाई। वर्षों से लंबित मामलों का समाधान एक ही दिन में होने से न्यायालयों का बोझ कम हुआ और पक्षकारों के चेहरों पर संतोष की मुस्कान दिखाई दी।
लोक अदालत की खास बात यह रही कि यहां केवल कानूनी विवाद नहीं सुलझे, बल्कि टूटते रिश्ते भी जुड़े। कहीं मां–पुत्र के बीच भरोसा लौटा, तो कहीं पति–पत्नी ने फिर से साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया। वित्तीय विवादों में भी आपसी समझदारी से समझौते हुए, जिससे समय और धन दोनों की बचत हुई।
नेशनल लोक अदालत ने यह संदेश दिया कि संवाद, सहमति और समाधान ही सच्चा न्याय है। सिंगरौली में आयोजित यह लोक अदालत न केवल न्यायिक प्रक्रिया का सफल उदाहरण बनी, बल्कि सामाजिक सौहार्द और विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम कर गई।




