भारत में प्रॉपर्टी खरीदना ज्यादातर लोगों के लिए जीवन का सबसे बड़ा निवेश होता है। लेकिन कई बार लोग जल्दबाजी या जानकारी की कमी में ऐसे फ्लैट या प्लॉट खरीद लेते हैं, जो कानूनी रूप से सही नहीं होते। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां फ्लैट बुक करने और टोकन देने के बाद खरीदार को पता चला कि वह संपत्ति कानूनी रूप से बेचने योग्य ही नहीं थी।
प्रॉपर्टी खरीदते समय इन डॉक्यूमेंट्स को कभी नजरअंदाज न करें
1. Title Deed (टाइटल डीड)
यह डॉक्यूमेंट बताता है कि प्रॉपर्टी का असली मालिक कौन है। अगर टाइटल क्लियर नहीं है, तो आप उस संपत्ति के कानूनी मालिक नहीं बन सकते।
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2. Sale Deed (सेल डीड)
यह अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जो खरीद-बिक्री को पूरा करता है। इसके बिना डील अधूरी मानी जाती है।
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3. Encumbrance Certificate (EC)
इससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन या कानूनी विवाद तो नहीं है। अगर EC साफ नहीं है, तो आप दूसरे का कर्ज अपने सिर ले सकते हैं।
4. RERA Registration
यह सुनिश्चित करता है कि प्रोजेक्ट सरकार के साथ रजिस्टर्ड है। बिना RERA वाले प्रोजेक्ट में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
5. Occupancy Certificate (OC)
यह प्रमाणित करता है कि प्रॉपर्टी रहने के लिए तैयार है। OC के बिना भविष्य में कानूनी दिक्कतें आ सकती हैं।
6. Approved Building Plan
यह बताता है कि निर्माण कार्य सरकारी नियमों के अनुसार हुआ है। अनधिकृत निर्माण आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकता है।
7. Property Tax Receipts
यह दिखाता है कि प्रॉपर्टी के सभी टैक्स समय पर चुकाए गए हैं। अगर टैक्स बाकी है, तो उसका भुगतान नए मालिक को करना पड़ सकता है।



