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मथुरा स्कूल विवाद : झूठे आरोप से बहाली तक की पूरी कहानी

मथुरा के नौहझील प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद (Headmaster Jaan Mohammad) पर जबरन नमाज पढ़वाने के आरोप विभागीय जांच में पूरी तरह झूठे साबित हुए। बीएसए ने बहाल किया। पढ़ें पूरी टाइमलाइन, जांच रिपोर्ट और सच्चाई।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 08 Feb 2026, 09:00 PM IST | 1 min read
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मथुरा जिले के नौहझील स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद के खिलाफ भाजपा के बाजना मंडल अध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोप  झूठी निकली। जांच समिति ने पाया कि आरोपों में कोई प्रमाण नहीं है और सभी शिकायतें झूठी तथा निराधार थीं। इसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने प्रधानाध्यापक को वापस ससम्मान बहाल कर दिया है।

विवाद क्या है ?

मथुरा के नौहझील प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद (Headmaster Jaan Mohammad) के खिलाफ 30 जनवरी को भाजपा बाजना मंडल अध्यक्ष द्वारा शिकायत पेश की गई। शिकायत में प्रमुख आरोप यह थे कि विद्यालय में

  • हिंदू बच्चों को “जबरन नमाज पढ़वाई जाती है”
  • बच्चों का माइंड वाश किया जाता है
  • अभिभावकों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता है
  • राष्ट्रगान का नियमित आयोजन नहीं होता

विभागीय कार्रवाई और जांच 

बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) रतन कीर्ति ने 31 जनवरी को तुरंत प्रभाव से निलंबन आदेश जारी करते हुए यह मामला छाता और मांट के खंड शिक्षा अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति को सौंपा। अधिकारियों को 3 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।

जांच टीमने क्या किया?

  1. विद्यालय का निरीक्षण
  2. छात्रों से प्रातः और मध्याह्न प्रतिक्रियाएं
  3. शिक्षकों के विस्तृत साक्षात्कार
  4. अभिभावकों से स्वतंत्र बयान
  5. विद्यालय के शैक्षणिक दस्तावेजों का ऑडिट

लेकिन जांच में भाजपा नेता द्वारा लगाए गए आरोप झूठे निकले, क्योंकि जांच में कोई ठोस तथ्य या दस्तावेज़ी सबूत  नहीं था।

जांच समिति की रिपोर्ट में क्या मिला ?

  1. नमाज के आरोप का कोई सबूत नहीं मिला।
    छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने स्पष्ट किया कि विद्यालय में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

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  2. धर्म प्रचार या माइंड वाश का दावा झूठा।
    अभिभावकों ने कहा कि विद्यालय में सभी बच्चों को समान रूप से पढ़ाया जाता है और धर्म-अधर्म का कोई प्रचार नहीं किया जाता।

  3. राष्ट्रगान और अन्य अनुष्ठान नियमित रूप से होते हैं।
    विद्यालय के शैक्षणिक रिकॉर्ड और साक्ष्यों से भी यह पुष्टि हुई।

  4. शिकायतकर्ता तथा विद्यालय समुदाय के बीच कोई विशेष निजी विवाद का संकेत नहीं मिला।
    इसका अर्थ है कि आरोप केवल मौखिक थीं, बुनियादी तथ्य पर आधारित नहीं।

 पूरी रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को सौंप दी गई।

बीएसए का आदेश और बहाली

बीएसए रतन कीर्ति ने रिपोर्ट के आधार पर आदेश जारी किया कि, जान मोहम्मद को ससम्मान बहाल किया जाए।उन्हें पूरा वेतन पुनः प्रदान किया जाए। पोस्टिंग को ऑनलाइन सरकारी पोर्टल पर सुनिश्चित किया जाए।

प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद का पक्ष

बहाली के बाद प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद (Headmaster Jaan Mohammad) ने कहा

“मैंने अपने कर्तव्यों को निष्पक्षता से निभाया है। आरोप पूरी तरह निराधार हैं। मैं उन लोगों को भी नहीं जानता जिन्होंने शिकायत की थी।”

उन्होंने राजनीतिकरण न करने की अपील की है और कहा कि इस प्रकरण ने उन्हें और उनके सहयोगियों को गहराई से प्रभावित किया है।

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