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भारत की GDP ग्रोथ पर झटका : Goldman Sachs ने 2026 का अनुमान घटाकर 5.9% किया

Goldman Sachs ने भारत की 2026 GDP ग्रोथ का अनुमान 7% से घटाकर 5.9% कर दिया है। बढ़ती महंगाई, तेल कीमतें और वैश्विक तनाव अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकते हैं।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 30 Mar 2026, 08:15 AM IST | 1 min read
भारत की GDP ग्रोथ पर झटका : Goldman Sachs ने 2026 का अनुमान घटाकर 5.9% किया
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वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर बड़ा संशोधन किया है। बैंक ने वर्ष 2026 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 7% से घटाकर 5.9% कर दिया है। यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है।

तेल कीमतें और वैश्विक तनाव बना मुख्य कारण

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और आपूर्ति बाधाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि देखी जा रही है। अनुमान है कि तेल की कीमतें अल्पावधि में 100–115 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर सीधा असर पड़ेगा।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ेगा, मुद्रा पर दबाव आएगा और महंगाई बढ़ेगी।

महंगाई दर 4.6% तक पहुंचने की आशंका

Goldman Sachs ने 2026 में भारत की महंगाई दर (CPI) 4.6% रहने का अनुमान जताया है, जो पहले 3.9% आंकी गई थी। हालांकि यह अभी भी Reserve Bank of India के 2% से 6% के दायरे में है, लेकिन बढ़ती कीमतें आम लोगों की क्रय शक्ति को प्रभावित कर सकती हैं।

महंगाई बढ़ने से दैनिक खर्च, ईंधन, परिवहन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की संभावना है, जिससे उपभोग मांग पर असर पड़ सकता है।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महंगाई और रुपये में गिरावट को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ोतरी कर सकता है।

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ब्याज दर बढ़ने से होम लोन, बिजनेस लोन और अन्य कर्ज महंगे हो सकते हैं, जिससे निवेश और उपभोग दोनों प्रभावित होंगे।

रुपये में कमजोरी और चालू खाते का दबाव

2026 में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 4% कमजोर हो चुका है। इसके चलते आयात महंगे हो रहे हैं और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़कर GDP के लगभग 2% तक पहुंचने का अनुमान है।

अन्य एजेंसियों का नजरिया

जहां Goldman Sachs ने सतर्क रुख अपनाया है, वहीं कुछ अन्य संस्थाएं अभी भी भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत मान रही हैं। उदाहरण के लिए, International Monetary Fund ने पहले भारत को वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताया था।

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