देश में बढ़ती लागत और बदलते मौसम के बीच किसानों के लिए चना की नई उन्नत वैरायटी उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नई किस्में कम पानी, कम खाद और कम समय में बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं। इससे खासतौर पर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किसानों को बड़ा फायदा मिल सकता है।
कौन-कौन सी हैं नई वैरायटी?
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कुछ प्रमुख उन्नत किस्में इस प्रकार हैं:
- JG-14 – जल्दी तैयार होने वाली, सूखा सहनशील
- JG-16 – अधिक पैदावार और रोग प्रतिरोधक क्षमता
- Pusa 372 – बेहतर दाना क्वालिटी, बाजार में अधिक कीमत
इन किस्मों की खासियत है कि ये कम सिंचाई में भी अच्छी उपज देती हैं।
लागत और मुनाफा
चना की नई वैरायटी अपनाने से किसानों की लागत में कमी आती है:
बीज लागत: ₹3,000–₹4,000 प्रति एकड़
खाद व सिंचाई: ₹2,000–₹3,000
कुल लागत: लगभग ₹6,000–₹7,000 प्रति एकड़
उत्पादन: 8–12 क्विंटल प्रति एकड़
बाजार भाव: ₹5,000–₹6,500 प्रति क्विंटल
संभावित कमाई: ₹40,000 से ₹70,000 प्रति एकड़
यानी कम लागत में अच्छा मुनाफा संभव है।

बुवाई और देखभाल कैसे करें?
बुवाई का सही समय: अक्टूबर से नवंबर
बीज उपचार: फफूंदनाशक से करें
सिंचाई: 2–3 बार पर्याप्त
खरपतवार नियंत्रण: समय पर निराई-गुड़ाई
सही तकनीक अपनाने से उत्पादन में 20–30% तक बढ़ोतरी देखी गई है।
सरकारी मदद और योजनाएं
किसानों को उन्नत बीज और तकनीक अपनाने के लिए Indian Council of Agricultural Research और Krishi Vigyan Kendra के माध्यम से प्रशिक्षण और सब्सिडी दी जाती है। कई राज्यों में बीज पर 50% तक अनुदान भी मिलता है।
किन बातों का रखें ध्यान?
- प्रमाणित बीज ही खरीदें
- खेत में जल निकासी सही रखें
- रोग दिखने पर तुरंत उपचार करें
चना की नई वैरायटी किसानों के लिए एक फायदेमंद विकल्प बनकर उभर रही है। कम लागत, कम पानी और बेहतर उत्पादन के कारण यह खेती अब पहले से ज्यादा लाभदायक हो सकती है। अगर किसान सही जानकारी और तकनीक के साथ खेती करें, तो कम समय में अच्छी आय हासिल कर सकते हैं।






