मध्यप्रदेश की राजनीति में सोमवार को बड़ा कानूनी फैसला सामने आया। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द कर दिया है। अदालत ने माना कि नामांकन के समय उम्मीदवार ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी हलफनामे में नहीं दी थी।
कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे भाजपा नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचित विधायक घोषित कर दिया गया है। इस निर्णय के साथ ही प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है।
आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप
मामले की शुरुआत तब हुई थी जब चुनाव में पराजित हुए भाजपा उम्मीदवार रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि कांग्रेस उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन के दौरान दाखिल किए गए शपथपत्र में अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने दस्तावेज और अन्य साक्ष्य पेश किए गए। जांच में सामने आया कि उम्मीदवार के खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित थे, लेकिन हलफनामे में उनकी पूरी जानकारी नहीं दी गई। अदालत ने इसे मतदाताओं से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना माना।
कोर्ट ने चुनाव परिणाम ही बदल दिया
हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने सुनवाई के बाद कांग्रेस विधायक का चुनाव शून्य घोषित कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे रामनिवास रावत को विजयी उम्मीदवार मानते हुए विधायक घोषित कर दिया।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उम्मीदवार चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देता है या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाता है तो अदालत चुनाव परिणाम को निरस्त कर सकती है। यह प्रावधान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत आता है।
सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं मुकेश मल्होत्रा
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस नेता मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील का विकल्प मौजूद है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वे इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं।
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और इस फैसले को प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।











