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सीधी पुलिस का बड़ा नवाचार: सभी थानों में QR कोड आधारित साइन लैंग्वेज ट्रांसलेटर, मूक-बधिर फरियादियों को मिलेगी तुरंत मदद

By: UTN Hindi ।। Digital Team

On: Tuesday, February 3, 2026 5:58 PM

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मध्यप्रदेश का सीधी जिला दिव्यांगजन हितैषी पुलिसिंग की दिशा में एक नई मिसाल बनकर उभरा है। जिले के सभी थानों और पुलिस चौकियों में अब QR कोड आधारित साइन लैंग्वेज ट्रांसलेटर सुविधा लागू कर दी गई है। इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए मूक-बधिर नागरिक सीधे पुलिस से संवाद कर सकेंगे और अपनी शिकायत बिना किसी बाधा के दर्ज करा पाएंगे।

पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी के नेतृत्व में आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान इस प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया गया। प्रशासन का दावा है कि यह व्यवस्था लागू करने वाला सीधी देश का पहला पुलिस जिला बन गया है, जहां लाइव साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर की सुविधा थानों में उपलब्ध है।

कैसे काम करेगी यह सुविधा

हर थाना और चौकी में लगाए गए क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करते ही संबंधित व्यक्ति सीधे वीडियो कॉल के माध्यम से साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर से जुड़ जाएगा। इंटरप्रेटर पुलिस अधिकारी और फरियादी के बीच संवाद स्थापित करेगा, जिससे शिकायत, बयान और जानकारी का आदान-प्रदान आसान हो सकेगा।

यह तकनीक बेंगलुरु की साइनेबल कम्युनिकेशन द्वारा विकसित की गई है, जो रियल-टाइम अनुवाद की सुविधा देती है।

पुलिसकर्मियों को भी मिला प्रशिक्षण

सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों को साइन लैंग्वेज का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया है। कार्यशाला में अधिकारियों को यह सिखाया गया कि दिव्यांगजनों से संवेदनशील तरीके से कैसे संवाद स्थापित किया जाए। इससे सेवा की गुणवत्ता और विश्वास दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

दिव्यांगजनों के लिए कैसे मिलगा फायदा ?

अब तक मूक-बधिर फरियादियों को पुलिस थानों में अपनी बात रखने के लिए परिजनों या दुभाषियों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे कई बार गोपनीयता और त्वरित कार्रवाई प्रभावित होती थी। नई व्यवस्था से वे स्वतंत्र, सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य जिलों और राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

संतोष कोरी, पुलिस अधीक्षक, सीधी
“हमारा उद्देश्य है कि पुलिस व्यवस्था सभी नागरिकों के लिए सुलभ बने। क्यूआर कोड आधारित साइन लैंग्वेज ट्रांसलेटर से मूक-बधिर भाई-बहनों को न्याय पाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।”

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