🌙 Loading...
Sehri: -- | Iftar: --
Ramadan Special

सड़क पर गाड़ियां आपस में रियल-टाइम बातचीत करेंगी । Vehicle-to-Vehicle – V2V

By: अजीत नारायण सिंह

On: Wednesday, January 28, 2026 8:44 AM

सड़क पर गाड़ियां आपस में रियल-टाइम बातचीत करेंगी । Vehicle-to-Vehicle – V2V
Google News
Follow Us

देश में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी तकनीकी पहल की तैयारी में है। वाहन-से-वाहन (Vehicle-to-Vehicle – V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम को जल्द लागू किया जा सकता है। इस तकनीक के जरिए वाहन आपस में रियल-टाइम जानकारी साझा कर सकेंगे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी।

22 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित संसदीय परामर्श समिति की बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने V2V तकनीक के लिए 30 गीगाहर्ट्ज़ रेडियो फ्रीक्वेंसी आवंटित कर दी है।

क्या है V2V तकनीक और कैसे काम करती है?

V2V यानी Vehicle-to-Vehicle Communication, एक वायरलेस तकनीक है जिसमें वाहन आपस में डेटा साझा करते हैं। इसमें वाहन की

  • स्पीड
  • लोकेशन
  • ब्रेकिंग
  • एक्सीलेरेशन
  • सड़क की स्थिति

जैसी जानकारियां पास की गाड़ियों तक तुरंत पहुंच जाती हैं।

यह तकनीक Vehicle-to-Everything (V2X) का हिस्सा है और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम के अंतर्गत आती है। इसका मॉडल एविएशन सेक्टर से प्रेरित है, जहां विमान आपस में अपनी स्थिति और गति की जानकारी साझा करते हैं।

कैसे काम करेगा V2V सिस्टम ?

MoRTH के अधिकारियों के अनुसार, हर वाहन में एक On Board Unit (OBU) लगाई जाएगी। यह डिवाइस आसपास के वाहनों से वायरलेस तरीके से जुड़कर ड्राइवर को अलर्ट भेजेगी।

यह सिस्टम अलर्ट देगा

  • अचानक ब्रेक लगाने वाले वाहन की जानकारी
  • कोहरे या कम विजिबिलिटी की चेतावनी
  • सड़क किनारे खड़े वाहनों की सूचना
  • ब्लैक स्पॉट और संभावित खतरे

V2V सिस्टम लगभग 300 मीटर की रेंज में काम करता है, जिससे समय रहते ड्राइवर को सतर्क किया जा सके।

भारत में सड़क हादसों की गंभीर स्थिति

भारत दुनिया में सबसे अधिक सड़क दुर्घटना मौतों वाला देश है।
आंकड़ों के अनुसार:

  • भारत: सबसे अधिक सड़क मौतें
  • चीन: भारत से 36% कम
  • अमेरिका: भारत से 25% कम

सरकार का मानना है कि V2V तकनीक से इन आंकड़ों में बड़ी गिरावट आ सकती है।

कितनी होगी लागत और कब होगा लागू?

MoRTH सचिव वी. उमाशंकर के अनुसार

  • OBU की कीमत: ₹5,000 से ₹7,000
  • पहले चरण में: नई गाड़ियों में अनिवार्य
  • बाद में: पुराने वाहनों में भी इंस्टॉलेशन
  • फ्री स्पेक्ट्रम: दूरसंचार विभाग द्वारा उपलब्ध
  • OEM कंपनियों के साथ मिलकर स्टैंडर्ड तैयार किए जा रहे हैं

सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के दौरान इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए।

V2V सिस्टम से जुड़ी चुनौतियां

हालांकि यह तकनीक बेहद उपयोगी है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने हैं

  1. डेटा प्राइवेसी का खतरा – वाहन और ड्राइवर की जानकारी सुरक्षित रखना चुनौती
  2. साइबर अटैक का जोखिम – सिस्टम हैक होने पर गंभीर खतरा
  3. फ्रीक्वेंसी लिमिटेशन – सभी वाहनों के लिए समान कवरेज चुनौतीपूर्ण
  4. तकनीकी स्टैंडर्डाइजेशन – सभी कंपनियों में समान तकनीक जरूरी

सरकार इसके लिए अलग नियम और साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार कर रही है।

किन देशों में पहले से लागू है V2V?

V2V तकनीक पहले से कई देशों में इस्तेमाल हो रही है

  • अमेरिका – सबसे आगे
  • जर्मनी
  • फ्रांस
  • यूनाइटेड किंगडम
  • जापान – ITS Connect सिस्टम
  • चीन

कुछ कार मॉडल जैसे Volkswagen Golf 8 और Cadillac में यह फीचर पहले से मौजूद है। भारत के साथ-साथ UAE, सऊदी अरब, ब्राजील और मैक्सिको में भी इस पर पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

Interesting Question
Question

FAQs : Vehicle-to-Vehicle (V2V) Technology in India

1. V2V तकनीक क्या है?

V2V (Vehicle-to-Vehicle) एक वायरलेस तकनीक है, जिसके जरिए वाहन आपस में स्पीड, ब्रेकिंग, लोकेशन और खतरे की जानकारी शेयर करते हैं ताकि हादसों से बचा जा सके।

2. भारत में V2V सिस्टम कब लागू होगा?

सरकार ने अभी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार 2026 में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

3. V2V तकनीक कैसे काम करती है?

हर वाहन में एक On Board Unit (OBU) लगेगा जो पास के वाहनों से रेडियो सिग्नल के जरिए डेटा साझा करेगा और ड्राइवर को खतरे की चेतावनी देगा।

4. क्या यह सिस्टम पुराने वाहनों में भी लगेगा?

हाँ, पहले इसे नए वाहनों में अनिवार्य किया जाएगा, उसके बाद पुराने वाहनों में भी फिट किया जाएगा।

5. V2V डिवाइस की कीमत कितनी होगी?

सरकार के अनुसार इसकी कीमत लगभग ₹5,000 से ₹7,000 के बीच होगी।

6. क्या V2V से सड़क हादसे कम होंगे?

हाँ, यह तकनीक अचानक ब्रेक, कोहरा, खड़े वाहन और ब्लैक स्पॉट की जानकारी पहले ही दे देती है, जिससे हादसों की संभावना काफी कम हो जाती है।

7. क्या इससे डेटा प्राइवेसी को खतरा है?

हां, डेटा सिक्योरिटी एक बड़ी चुनौती है। सरकार इसके लिए अलग से साइबर सिक्योरिटी नियम और स्टैंडर्ड बना रही है।

8. किन देशों में पहले से V2V तकनीक चल रही है?

अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, जापान, चीन और यूके जैसे देशों में V2V तकनीक पहले से उपयोग में है।

9. क्या V2V सिस्टम इंटरनेट पर निर्भर होगा?

नहीं, यह रेडियो फ्रीक्वेंसी पर आधारित होगा और बिना इंटरनेट के भी काम करेगा।

10. V2V और V2X में क्या अंतर है?

  • V2V : वाहन से वाहन संपर्क
  • V2X : वाहन से वाहन, सड़क, ट्रैफिक सिग्नल और नेटवर्क से संपर्क

अजीत नारायण सिंह

अजीत नारायण सिंह बतौर पत्रकार सामाजिक विषयों और समसामयिक मुद्दों पर लिखते है। उनका लेखन समाज में जागरूकता लाने, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर केंद्रित रहता है। वे सरल भाषा और तथ्यपरक शैली के लिए जाने जाते हैं।
For Feedback - Feedback@urjanchaltiger.in

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now