देश की सर्वोच्च अदालत ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें अस्थायी रूप से लागू करने पर रोक लगा दी है। ये नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लाए गए थे, लेकिन इन्हें लेकर देशभर में विरोध देखने को मिल रहा था।
28 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि
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“ऐसे नियम समाज को जोड़ने के बजाय बांट सकते हैं। हमें यह देखना होगा कि हम कहीं अमेरिका जैसी स्थिति की ओर तो नहीं बढ़ रहे।”
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कोर्ट ने फिलहाल 2012 के यूजीसी रेगुलेशन को ही लागू रखने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की पीठ ने सुनवाई के दौरान कई अहम सवाल उठाए
- नियमों की भाषा अस्पष्ट और भ्रमित करने वाली है
- दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता
- जाति के नाम पर अलग-अलग श्रेणियां बनाना सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकता है
- विश्वविद्यालयों को “भय का माहौल” नहीं बनाना चाहिए
कोर्ट ने साफ कहा कि
“शिक्षा संस्थान ज्ञान के केंद्र हैं, वहां सामाजिक विभाजन नहीं होना चाहिए।”
क्या थे यूजीसी के नए नियम?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम जारी किए थे, जिनका उद्देश्य था
- SC/ST/OBC छात्रों के साथ भेदभाव रोकना
- हर संस्थान में Equal Opportunity Cell बनाना
- शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान
लेकिन इन नियमों में झूठी शिकायत पर दंड का प्रावधान नहीं रखा गया था, जिस पर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई गई।
2012 बनाम 2026 नियम : बड़ा अंतर
| बिंदु | 2012 नियम | 2026 नियम |
|---|---|---|
| लागू होना | अनिवार्य नहीं | अनिवार्य |
| दायरा | SC/ST | SC/ST/OBC |
| झूठी शिकायत पर सजा | हां | नहीं |
| समिति गठन | वैकल्पिक | अनिवार्य |
| दुरुपयोग रोक | मौजूद | नहीं |
इन्हीं बिंदुओं के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 2026 के नियमों को फिलहाल निलंबित कर दिया।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश ने कहा
“क्या हम जातिविहीन समाज की ओर बढ़ रहे हैं या फिर पीछे लौट रहे हैं?”
कोर्ट ने यह भी कहा कि एक ही जाति के भीतर भी भेदभाव होता है, ऐसे में केवल जाति के आधार पर नियम बनाना समस्या का हल नहीं है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
- विपक्ष ने सरकार पर नियमों को जल्दबाजी में लागू करने का आरोप लगाया
- बीजेपी नेताओं ने कहा कि कोर्ट का फैसला मान्य है
- सरकार ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करेगी
अगली सुनवाई कब?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 तय की है। तब तक 2012 के नियम ही लागू रहेंगे।





