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स्वतंत्र भारद्वाज जैसे लोग कैसे खुलेआम ऐसा बोलते हैं ? मैंने सिर फोड़ा, फिर भी जेल नहीं गया…

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 04 Sep 2026, 09:37 AM IST | 1 min read
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दिल्ली के Jantar-Mantar पर 23 जून 2026 को ‘कॉक्रोच जनता पार्टी’ (CJP) के आंदोलन के दौरान हुई कथित मारपीट का मामला एक वायरल  Podcast Video के बाद फिर चर्चा में है। 21 वर्षीय Swatantra Bhardwaj ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि उसने आंदोलन में शामिल एक व्यक्ति के सिर पर हमला किया था और उसे गंभीर चोट लगी थी। उसके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि घटना में घायल व्यक्ति के सिर पर किसी हथियार से हमला नहीं हुआ था। पुलिस के मुताबिक चोट एक आरोपी के हाथ में पहने कड़े से लगी थी और अस्पताल की जांच में चोट साधारण पाई गई।

Podcast में Swatantra Bhardwaj ने क्या दावा किया?

एक घंटे की YouTube पॉडकास्ट बातचीत में स्वतंत्र भारद्वाज ने जंतर-मंतर की घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि उसने निशू के पिता के सिर पर हमला किया था। उसके मुताबिक घायल व्यक्ति के सिर पर 60 टांके आए और उन्हें एंबुलेंस में गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया।

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Swatantra Bhardwaj ने यह भी दावा किया कि घटना के बाद भी वह जेल नहीं गया और अगले दिन बाहर घूम रहा था।

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उसने बातचीत के दौरान  Swatantra Bhardwaj अपने राजनीतिक संपर्कों का भी जिक्र किया। उसके दावे के मुताबिक कपिल मिश्रा उसके बड़े भाई जैसे हैं और एक फोन के कारण उसकी कथित तौर पर मदद हुई। उसने चिराग पासवान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपना “बड़ा भाई” बताते हुए समर्थन मिलने की बात कही।

पुलिस के उपकरणों को लेकर पूछे गए सवाल पर भी भारद्वाज ने कथित तौर पर कहा कि उसके जूते और लाठी दिल्ली पुलिस की हैं और वह बिना आवेदन किए पुलिस जैसी चीजों का इस्तेमाल करता है।

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने घटना को लेकर अपना पक्ष रखा। पुलिस के अनुसार 23 जून को जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान बाचाबाची हुई थी। इस दौरान गाजियाबाद निवासी 38 वर्षीय संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी।

पुलिस का कहना है कि चोट किसी हथियार से नहीं, बल्कि एक आरोपी के हाथ में पहने कड़े से लगी थी। पुलिस के मुताबिक RML अस्पताल के डॉक्टरों ने चोट को साधारण बताया था और खोपड़ी में फ्रैक्चर होने का दावा तथ्यहीन है।

मामले में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान सूरज कुमार (24) और स्वतंत्र भारद्वाज (21) को नोटिस देकर पूछताछ की गई है।

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में किसी तरह की राजनीतिक मध्यस्थता या दबाव नहीं है और कार्रवाई कानून के अनुसार की जा रही है। पुलिस के मुताबिक जल्द ही अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

राहुल गांधी ने उठाए केंद्र सरकार पर सवाल

वायरल वीडियो और मामले की रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने निशू को संबोधित करते हुए समर्थन जताया और कहा कि वह उसके साथ खड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ छात्रों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति के घायल होने के मामले में आरोपी खुलेआम घूम रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया कि ऐसे मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। हालांकि, ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

CJP संस्थापक ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए

कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी घटना के दौरान पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, उन्होंने घटना के बाद DCP से आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की थी, लेकिन उन्हें कथित तौर पर अदालत जाने की सलाह दी गई।

CJP की ओर से भी वायरल वीडियो को लेकर सवाल उठाया गया है। संगठन का कहना है कि वीडियो में संबंधित व्यक्ति खुद प्रदर्शनकारियों पर हमला करने और राजनीतिक नेताओं के समर्थन का दावा करता दिखाई देता है।

अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

इस पूरे मामले में एक तरफ स्वतंत्र भारद्वाज के पॉडकास्ट में किए गए गंभीर दावे हैं, जबकि दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान है, जिसमें खोपड़ी टूटने और गंभीर चोट के दावे को खारिज किया गया है।

पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच पूरी कर चार्जशीट अदालत में दाखिल की जाएगी। ऐसे में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के समक्ष पेश होने वाले साक्ष्य ही यह स्पष्ट करेंगे कि 23 जून की घटना में वास्तव में क्या हुआ था।

फिलहाल वायरल वीडियो में किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य मानना उचित नहीं होगा। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और न्यायिक प्रक्रिया दोनों महत्वपूर्ण हैं।

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