सिंगरौली। जिले के ग्राम सिद्धिखुर्द और हरहवा क्षेत्र में स्थित मेसर्स सासन पावर लिमिटेड के ऐश डाइक-1 के क्षतिग्रस्त होने के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी गौरव बैनल ने कंपनी के महाप्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी कर सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर जवाब मांगा है।
प्रशासन ने कंपनी प्रबंधन को नोटिस प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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बारिश के बाद ऐश डाइक के बाहरी हिस्से में लैंडस्लाइड
जिला प्रशासन द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, 14 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि तेज बारिश के बाद ऐश डाइक-1 के बाहरी हिस्से में लैंडस्लाइड की स्थिति बनी।
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प्रशासन के मुताबिक, इसके कारण बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश डाइक से बाहर निकलकर आसपास के क्षेत्रों में फैल गई। निरीक्षण रिपोर्ट में लगभग 5,760 टन फ्लाई ऐश के बहने का उल्लेख किया गया है।
यह फ्लाई ऐश आसपास के कृषि क्षेत्रों और आवासीय इलाकों तक पहुंचने की बात कही गई है, जिससे जनसुरक्षा, पर्यावरण और कृषि भूमि को लेकर प्रशासन ने चिंता जताई है।
फ्रीबोर्ड और मानसून पूर्व सुरक्षा उपायों पर सवाल
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) और अनुविभागीय दण्डाधिकारी द्वारा प्रस्तुत निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने ऐश डाइक में निर्धारित फ्रीबोर्ड मानकों और मानसून पूर्व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
नोटिस में कहा गया है कि जिला दण्डाधिकारी द्वारा 4 जून 2026 को मानसून से पहले ऐश डाइक की सुरक्षा को लेकर दिए गए निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया गया।
प्रशासन ने इसी आधार पर कंपनी प्रबंधन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों के पालन में कथित कमी के लिए जिम्मेदारी किसकी है।
MPPCB की सम्मति के उल्लंघन का भी उल्लेख
जिला प्रशासन के अनुसार, निरीक्षण रिपोर्ट में सासन पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सम्मति की शर्तों के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है।
प्रशासन ने मामले को केवल औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ा विषय न मानते हुए इसे जनसुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कृषि भूमि की सुरक्षा से संबंधित गंभीर मामला माना है।
जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी
कारण बताओ नोटिस में कंपनी से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि जनसुरक्षा, पर्यावरण और कृषि भूमि को हुई क्षति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की कार्रवाई क्यों न की जाए।
इस बिंदु पर कंपनी से निर्धारित अवधि में अपना तथ्यात्मक पक्ष रखने को कहा गया है।

संचालन की सम्मति निरस्त करने का प्रस्ताव भेजने की चेतावनी
प्रशासन ने नोटिस में यह भी कहा है कि यदि जांच में संबंधित नियमों और पर्यावरणीय प्रावधानों का उल्लंघन स्थापित होता है, तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम, 1974 और वायु प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम, 1981 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इसके तहत उद्योग की संचालन सम्मति निरस्त किए जाने के संबंध में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भोपाल को प्रस्ताव भेजने की चेतावनी भी दी गई है।
तीन दिन में जवाब नहीं मिला तो एकतरफा कार्रवाई
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब देना होगा। यदि जवाब संतोषजनक और तथ्यात्मक नहीं पाया जाता है, तो प्रशासन द्वारा नियमानुसार एकतरफा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले प्रशासनिक और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट के आधार पर हादसे के कारणों और सुरक्षा मानकों के पालन की स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है।
फसल और संपत्ति के नुकसान का कराया जाएगा आकलन
ऐश डाइक से फ्लाई ऐश के बहाव के कारण प्रभावित कृषि भूमि, फसलों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का भी आकलन कराया जाएगा।
प्रशासन के अनुसार, नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद प्रभावित संपत्तियों और फसलों को हुई क्षति की नियमानुसार वसूली कंपनी से किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।
जनसुरक्षा और पर्यावरण को लेकर प्रशासन सख्त
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐश डाइक की घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जनसुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और प्रभावित लोगों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
अब पूरे मामले में कंपनी की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब और संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।



