Urjanchal Tiger
मंगलवार, 29 सितंबर 2026 |

No Live TV Stream Available

Please check back later.

Advertisement
Welcome Gift: 2,000 Reward Points

SBI BPCL Credit Card - Best Card for fuel!

बढ़ते तेल कि कीमत पर बचत !
SBI
Apply Now

Parle-G फैक्ट्री बंद : एक युग का अंत, जानिए पूरी कहानी

मुंबई की ऐतिहासिक Parle-G फैक्ट्री अब इतिहास बनने जा रही है। जानिए Parle-G बिस्किट की अनकही कहानी, फैक्ट्री बंद होने की वजह, गर्ल इमेज का सच और आगे क्या होगा इस ज़मीन का भविष्य।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 31 Jan 2026, 07:02 AM IST | 1 min read
Parle-G
Share:
Advertisement

भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां कभी Parle-G बिस्किट न खाया गया हो। चाय के साथ डुबोकर खाया जाने वाला यह बिस्किट सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि पीढ़ियों की भावनाओं से जुड़ा हुआ नाम बन चुका है। लेकिन अब इसी Parle-G से जुड़ी एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है।

मुंबई के विले पार्ले स्थित Parle-G की ऐतिहासिक फैक्ट्री अब बंद हो चुकी है। यह वही फैक्ट्री है, जहां से भारत के सबसे लोकप्रिय बिस्किट ने अपनी पहचान बनाई थी। साल 1929 में स्थापित यह फैक्ट्री अब एक नए व्यावसायिक प्रोजेक्ट में तब्दील होने जा रही है।

1929 से शुरू हुआ था Parle-G का सफर

Parle Products की स्थापना 1929 में मोहनलाल दयाल चौहान ने मुंबई के विले पार्ले इलाके में की थी। शुरुआत में यहां टॉफी और कैंडी बनाई जाती थीं, लेकिन साल 1939 में कंपनी ने बिस्किट निर्माण की ओर कदम बढ़ाया। यहीं से जन्म हुआ Parle-G का, जिसने धीरे-धीरे देश के हर घर में अपनी जगह बना ली।

दिलचस्प बात यह है कि “Parle” नाम भी इसी इलाके से जुड़ा है, जिसे Padle और Irle गांवों या फिर विरलेश्वर और पारलेश्वर मंदिरों से जोड़ा जाता है।

Parle-G की पैकेट वाली लड़की का सच

Parle-G के पैकेट पर बनी मासूम बच्ची को लेकर दशकों से रहस्य बना हुआ था। कई लोग इसे सुधा मूर्ति, नीरू देशपांडे या किसी असली बच्ची से जोड़ते रहे। लेकिन Parle Products के वाइस प्रेसिडेंट ने स्पष्ट किया कि यह बच्ची असल में कोई वास्तविक व्यक्ति नहीं है।

यह चित्र 1960 के दशक में कलाकार मगनलाल दहिया द्वारा Everest Creative के लिए डिजाइन किया गया था। इसका उद्देश्य मासूमियत, शुद्धता और पारिवारिक भावनाओं को दर्शाना था। यही वजह है कि यह चेहरा दशकों तक लोगों के दिलों में बस गया।

Parle-G

2016 में बंद हुआ उत्पादन, अब होगा पुनर्विकास

Parle Products ने वर्ष 2016 के मध्य में इस फैक्ट्री में बिस्किट निर्माण बंद कर दिया था। अब 7 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA) ने इस भूमि के पुनर्विकास को मंजूरी दे दी है।

करीब 54,438.80 वर्ग मीटर (13.54 एकड़) क्षेत्र में फैली इस जमीन पर अब एक बड़ा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। इसके लिए 21 पुरानी इमारतों को गिराने की अनुमति दी गई है।

यह फैसला न केवल औद्योगिक दृष्टि से अहम है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी लोगों को झकझोरने वाला है।

Parle सिर्फ बिस्किट नहीं, एक विरासत है

Parle-G के अलावा कंपनी ने Hide & Seek, Krackjack, Monaco जैसे लोकप्रिय बिस्किट भी बनाए। साथ ही Kismi, Melody, Eclairs, Mazelo जैसी टॉफियां और स्नैक्स, रस्क, केक व ब्रेकफास्ट सीरियल्स भी बाजार में उतारे।

हालांकि वक्त के साथ बाजार बदला, प्रतिस्पर्धा बढ़ी, लेकिन Parle-G की लोकप्रियता कभी कम नहीं हुई।

यादों में हमेशा जिंदा रहेगा Parle-G

भले ही विले पार्ले की फैक्ट्री अब इतिहास बन गई हो, लेकिन Parle-G की खुशबू, स्वाद और उससे जुड़ी यादें कभी खत्म नहीं होंगी। यह सिर्फ एक बिस्किट नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के बचपन का हिस्सा है।

चाहे आने वाले समय में बाजार कितना भी बदल जाए, Parle-G हमेशा दिलों में अपनी जगह बनाए रखेगा।

Advertisement

ADVERTISEMENT
Advertisement