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बच्चों के लिए स्कूल बना रहे थे अब्दुल, प्रशासन ने चला दिया बुलडोज़र ? Madrasa rumours and demolition

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 17 Jan 2026, 04:48 PM IST | 1 min read
Madhya Pradesh Betul school demolition
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Madrasa rumours and demolition। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक निजी स्कूल को “अवैध मदरसा” बताकर फैलाई गई अफवाहों के बाद आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया गया। यह स्कूल बच्चों को नर्सरी से लेकर कक्षा 8 तक शिक्षा देने के उद्देश्य से बनाया जा रहा था, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई ने एक व्यक्ति की वर्षों की मेहनत और सपनों को मिट्टी में मिला दिया।

क्या है पूरा मामला?

धाबा गांव निवासी अब्दुल नईम ने अपने गांव और आसपास के आदिवासी इलाकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से एक निजी स्कूल की नींव रखी थी। उन्होंने करीब 20 लाख रुपये जो उन्होंने कर्ज और पारिवारिक बचत से जुटाए इस प्रोजेक्ट में लगाए।

अब्दुल नईम के अनुसार

  • जमीन का कमर्शियल डायवर्जन कराया गया था
  • ग्राम पंचायत से एनओसी ली गई थी
  • 30 दिसंबर को स्कूल शिक्षा विभाग में आवेदन भी जमा किया गया
  • स्कूल अभी निर्माणाधीन था, न तो क्लास शुरू हुई थी और न ही कोई छात्र नामांकित था

अफवाहों से मचा हड़कंप

11 जनवरी को गांव में अफवाह फैली कि यहां अवैध मदरसा बनाया जा रहा है। जबकि गांव में केवल तीन मुस्लिम परिवार रहते हैं और स्कूल का ढांचा अभी अधूरा था।

अब्दुल नईम ने कहा

“यह सिर्फ एक स्कूल था, मदरसा नहीं। कुछ लोगों ने जानबूझकर गलत बातें फैलाईं। मैं खुद प्रशासन के पास दस्तावेज लेकर गया, लेकिन मेरी बात नहीं सुनी गई।”

13 जनवरी को चला बुलडोजर

13 जनवरी को जब अब्दुल नईम कलेक्टर से मिलने बैतूल जा रहे थे, उसी दौरान

  • भारी पुलिस बल के साथ JCB मशीन पहुंची
  • स्कूल का अगला हिस्सा और शेड तोड़ दिया गया
  • किसी प्रकार की अंतिम सुनवाई नहीं हुई

प्रशासन का कहना है ?

SDM अजीत मरावी ने कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा

“ग्राम पंचायत से अतिक्रमण की शिकायत मिली थी। जांच में पाया गया कि निर्माण का एक हिस्सा नियमों के खिलाफ था, इसलिए केवल उसी हिस्से को हटाया गया है।”

अब्दुल नईम का आरोप

नईम ने प्रशासन के दावों को खारिज करते हुए कहा

“अगर कोई दस्तावेज़ अधूरा था तो जुर्माना लिया जाता। बिना सुनवाई के तोड़फोड़ करना अन्याय है। मेरा मकसद सिर्फ बच्चों को पढ़ाना था।”

बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक निर्माण का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश में फैल रही अफवाहों, प्रशासनिक जल्दबाजी और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति अविश्वास का प्रतीक बन गया है।

क्या सिर्फ अफवाहों के आधार पर किसी का सपना तोड़ा जाना सही है?

क्या शिक्षा जैसे क्षेत्र में राजनीति और संदेह की कोई जगह होनी चाहिए?

https://urjanchaltiger.in/news/indore-contaminated-water-rahul-gandhi-visit-bhagirathpura/194326/

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