पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने कच्चे तेल और गैस की सप्लाई को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो कई देशों में एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस आपूर्ति क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में यदि यहां युद्ध या सैन्य टकराव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो बड़ी मात्रा में ऊर्जा का आयात करते हैं।
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भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस महंगे होने से घरेलू बाजार में भी ईंधन और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ परिवहन और उद्योग क्षेत्र की लागत भी बढ़ सकती है।
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ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम हो जाता है तो सप्लाई पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर संघर्ष लंबा चलता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने की आशंका से कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की हर हलचल का असर भारत जैसे आयातक देशों पर जल्दी दिखाई देता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर वैश्विक स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।





