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ईरान-अमेरिका संघर्ष खत्म? इस्लामाबाद समझौते से Hormuz Strait खोलने की तैयारी

पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच संभावित युद्धविराम योजना सामने आई है, जिससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य दोबारा खुल सकता है और वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ेगा।

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 06 Apr 2026, 03:38 PM IST | 1 min read
ईरान-अमेरिका संघर्ष खत्म? इस्लामाबाद समझौते से Hormuz Strait खोलने की तैयारी
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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल सामने आई है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में तैयार किए गए एक प्रस्ताव के तहत दोनों देशों के बीच युद्धविराम की संभावना जताई जा रही है, जो सोमवार से लागू हो सकता है। इस प्रस्ताव के लागू होने पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने एक दो-स्तरीय योजना तैयार कर ईरान और अमेरिका के बीच साझा की है। इस योजना में पहले चरण में तत्काल युद्धविराम और दूसरे चरण में व्यापक शांति समझौता शामिल है। प्रस्ताव को अस्थायी रूप से “इस्लामाबाद समझौता” नाम दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir ने इस मुद्दे पर लगातार संपर्क बनाए रखा है और अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ रातभर बातचीत की है। पाकिस्तान इस पूरी वार्ता में एकमात्र संचार माध्यम के रूप में कार्य कर रहा है।

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प्रस्ताव के तहत, युद्धविराम लागू होते ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा। इसके बाद 15 से 20 दिनों के भीतर स्थायी समझौते की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अंतिम चरण में इस समझौते पर इस्लामाबाद में आमने-सामने वार्ता के जरिए मुहर लग सकती है।

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ईरान-अमेरिका संघर्ष खत्म? इस्लामाबाद समझौते से Hormuz Strait खोलने की तैयारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस व्यापक समझौते में ईरान द्वारा परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे न बढ़ाने की प्रतिबद्धता शामिल हो सकती है। इसके बदले में अमेरिका और सहयोगी देश ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, अब तक ईरान की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पाकिस्तान और चीन के समर्थन के बावजूद ईरान ने अभी तक अस्थायी युद्धविराम के लिए सहमति नहीं दी है।

यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट गहरा रहा है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल के परिवहन का प्रमुख मार्ग है, और इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल के दिनों में युद्धविराम पर जोर दिया है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बहाल होगी, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल, सभी पक्षों की सहमति का इंतजार है, जो इस प्रस्ताव के भविष्य का निर्धारण करेगी।

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