Urjanchal Tiger
मंगलवार, 8 सितंबर 2026 |

No Live TV Stream Available

Please check back later.

Advertisement
Welcome Gift: 2,000 Reward Points

SBI BPCL Credit Card - Best Card for fuel!

बढ़ते तेल कि कीमत पर बचत !
SBI
Apply Now

ईरान–इजरायल युद्ध , महंगाई बढ़ने की आहट और शेयर बाजार में गिरावट ! बटुआ संभाल भईया… बटुआ

ईरान–इजरायल युद्ध , महंगाई बढ़ने की आहट और शेयर बाजार में गिरावट ! बटुआ संभाल भईया... बटुआ.. ईरान–इजरायल तनाव बढ़ने से भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमत, सोना, रुपये की वैल्यू और शेयर बाजार में क्या बदलाव होगा, जानिए पूरी रिपोर्ट।

नौशाबा अंजुम

Author | Updated: 02 Mar 2026, 10:51 AM IST | 1 min read
ईरान–इजरायल युद्ध , महंगाई बढ़ने की आहट और शेयर बाजार में गिरावट ! बटुआ संभाल भईया... बटुआ
Share:
Advertisement

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव भारत से हजारों किलोमीटर दूर जरूर है, लेकिन इसका असर सीधे भारतीय लोगों की जेब पर पड़ सकता है। वैश्विक हालात बिगड़ने पर सबसे पहले कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं और इसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर ज्यादा होता है। 2 मार्च 2026 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और सोने की कीमतों में हलचल देखी जा रही है, जिससे निवेशक और आम लोग दोनों सतर्क हैं।

महंगा होगा कच्चा तेल

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। अगर वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है और यह 6,600 रुपये से बढ़कर 8,300 रुपये प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो भारत का आयात बिल बहुत तेजी से बढ़ जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का आयात खर्च 80,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल और LPG गैस की कीमतों पर पड़ेगा। आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमत 5 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती है।

New Edition

Read Today's E-Magazine

Swipe through the complete digital edition of Urjanchal Tiger right on your screen.

शेयर बाजार में गिरावट और निवेशकों की चिंता

वैश्विक तनाव बढ़ने पर विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं। इससे शेयर बाजार में गिरावट आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में निफ्टी में 3 से 7 प्रतिशत तक गिरावट संभव है।

Advertisement

एविएशन, ऑटो और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव आ सकता है क्योंकि इनका खर्च सीधे तेल की कीमतों पर निर्भर होता है। वहीं, रक्षा कंपनियों और सोने से जुड़े शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है।

बढ़ेगी महंगाई

जब भारत ज्यादा तेल खरीदता है तो डॉलर की मांग बढ़ती है। इससे रुपये की कीमत कमजोर होती है। अभी डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 83 रुपये के आसपास है, लेकिन तनाव बढ़ने पर यह 85 से 90 रुपये प्रति डॉलर तक जा सकता है।

रुपये की कमजोरी का असर इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, लैपटॉप और अन्य आयातित सामान पर पड़ेगा। कंपनियां बढ़ी लागत को ग्राहकों पर डालेंगी, जिससे आम लोगों की खर्च क्षमता प्रभावित होगी।

सोने की कीमतों में तेजी का संकेत

वैश्विक संकट के समय निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोना खरीदते हैं। इससे सोने की कीमत बढ़ती है। मौजूदा हालात में अगर तनाव और बढ़ता है तो सोना 72,000 से 78,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

इसका असर ज्वेलरी खरीदने वाले लोगों और निवेशकों दोनों पर पड़ेगा। शादी के सीजन में सोना खरीदना महंगा हो सकता है।

हवाई किराया और विदेश में काम करने वाले भारतीयों पर असर

मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप और अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स महंगी हो सकती हैं। किराए में 5,000 से 15,000 रुपये तक की बढ़ोतरी संभव है। खाड़ी देशों में काम करने वाले 90 लाख से ज्यादा भारतीयों की स्थिति भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां से आने वाला पैसा भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है।

आम लोगों के लिए क्या है इसका मतलब

वैश्विक तनाव सिर्फ अंतरराष्ट्रीय खबर नहीं है, इसका असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, सोना महंगा होगा, शेयर बाजार प्रभावित होगा और महंगाई बढ़ सकती है।

इसलिए आने वाले समय में निवेश और खर्च से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेना जरूरी है। विशेषज्ञ सुरक्षित निवेश विकल्पों पर ध्यान देने और अनावश्यक खर्च से बचने की सलाह दे रहे हैं।

Advertisement

ADVERTISEMENT
Advertisement