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Health Insurance के बाद भी 39% खर्च जेब से, क्यों ?

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) को सुरक्षा कवच माना जाता है, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है। हाल ही में एक मामला सामने आया, जहां बीमा होने के बावजूद मरीज के परिवार को रातों-रात लाखों रुपये का इंतजाम करना पड़ा।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 18 Mar 2026, 12:48 PM IST | 1 min read
Health Insurance के बाद भी 39% खर्च जेब से, क्यों ?
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भारत में हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) को सुरक्षा कवच माना जाता है, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है। हाल ही में एक मामला सामने आया, जहां बीमा होने के बावजूद मरीज के परिवार को रातों-रात लाखों रुपये का इंतजाम करना पड़ा। यह स्थिति देश में तेजी से बढ़ते मेडिकल खर्च और अंडरइंश्योरेंस की गंभीर समस्या को उजागर करती है।

Health Insurance के बाद भी 39% खर्च जेब से

देश में करीब 39% हेल्थकेयर खर्च सीधे लोगों की जेब से जाता है। यानी बीमा होने के बावजूद अस्पताल का पूरा खर्च कवर नहीं हो पाता।

यह स्थिति खासकर मध्यम वर्ग के लिए चिंता का विषय बन रही है, जहां लोग सीमित कवरेज वाली पॉलिसी लेकर सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन असल में जोखिम बना रहता है।

तेजी से बढ़ रही मेडिकल महंगाई

भारत में मेडिकल महंगाई दर लगभग 14% प्रति वर्ष है, जो एशिया में सबसे ज्यादा मानी जाती है।

इसका सीधा असर इलाज के खर्च पर पड़ रहा है

  • आज की ₹5 लाख की सर्जरी
  • अगले 5-6 साल में ₹9-10 लाख तक पहुंच सकती है

यानी मौजूदा बीमा कवरेज भविष्य के खर्च के लिए पर्याप्त नहीं है।

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अंडरइंश्योरेंस : सबसे बड़ा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार आज सबसे बड़ा जोखिम अंडरइंश्योरेंस (कम बीमा कवरेज) है।

अधिकांश लोग केवल कंपनी द्वारा दिए गए हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर रहते हैं। लेकिन

  • नौकरी बदलते ही
  • नौकरी छूटने पर
  • या बिजनेस शुरू करने पर

यह कवर खत्म हो जाता है, और पूरा आर्थिक बोझ व्यक्ति पर आ जाता है।

बीमा पॉलिसी समझना भी चुनौती

कई लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को समझना भी आसान नहीं है।

  • क्या कवर है, क्या नहीं
  • कितना क्लेम मिलेगा
  • कौन से खर्च बाहर हैं

इन सभी बातों की स्पष्ट जानकारी न होने से संकट के समय परेशानी बढ़ जाती है।

  • Health Insurance अब सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि सही प्लानिंग का विषय बन चुका है। अंडरइंश्योरेंस की अनदेखी भविष्य में भारी आर्थिक संकट ला सकती है। समय रहते सही निर्णय लेना ही समझदारी है।

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