सिंगरौली। जिले के ग्राम पंचायत चिंगनी टोला में पशुओं के चरने और पानी पीकर ठहरने के लिए आरक्षित चारागाह की भूमि पर कथित रूप से मकान निर्माण कराए जाने का मामला सामने आया है। इसको लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपकर आरक्षित भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और सुरक्षित रखने की मांग की है। सरकारी रिकॉर्ड में पशुओं के चारागाह के लिए दर्ज जमीन पर कथित कब्जे और मकान निर्माण का मामला अब कलेक्टर तक पहुंच गया है। ग्राम पंचायत चिंगनी टोला के ग्रामीणों ने आरक्षित चारागाह की जमीन को बचाने के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे आवेदन में बताया कि विकासखंड बैढ़न के चिंगनी टोला स्थित खसरा नंबर 391 की 16.926 हेक्टेयर भूमि वर्ष 1982 में ग्रामीणों की मांग पर मवेशियों के चरने और पानी पीकर ठहरने के लिए आरक्षित की गई थी। लंबे समय से गांव के पशु इसी जमीन का उपयोग करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान सरपंच द्वारा चारागाह की जमीन पर अपने परिवार के सदस्यों के लिए मकान बनवाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि चारागाह की जमीन पर निर्माण जारी रहा तो गांव के पशुओं के लिए चरने और ठहरने का परंपरागत स्थान समाप्त हो जाएगा। उन्होंने पुराने राजस्व रिकॉर्ड और वर्ष 1982 के आदेश का हवाला देते हुए प्रशासन से जमीन की सीमांकन जांच कराने की मांग की है।
आवेदनकर्ताओं ने कलेक्टर से मौके पर राजस्व अधिकारियों की टीम भेजकर वास्तविक स्थिति की जांच कराने, निर्माण कार्य की वैधानिकता स्पष्ट करने और चारागाह की जमीन को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने की मांग की है। अब सवाल यह है कि पशुओं के लिए आरक्षित 16.926 हेक्टेयर जमीन पर हो रहे कथित निर्माण की प्रशासन कब जांच कराएगा और ग्रामीणों की शिकायत पर क्या कार्रवाई होगी?



