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बजट 2026 से पहले अर्थव्यवस्था की हकीकत : आंकड़े मजबूत, लेकिन सवाल बरकरार

बजट 2026 से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी है? 7.3% ग्रोथ, कम महंगाई, लेकिन कमजोर निवेश और रोजगार संकट, पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

UTN Hindi ।। Digital Team

Author | Updated: 31 Jan 2026, 12:55 PM IST | 1 min read
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जब निर्मला सीतारमण इस रविवार केंद्रीय बजट 2026 पेश करने की तैयारी कर रही हैं, तब पहली नज़र में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत दिखाई देती है। चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3% रहने का अनुमान है और देश 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दहलीज पर खड़ा है।

जीडीपी के लिहाज़ से भारत अब जापान को पीछे छोड़ते हुए एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर है। खुदरा महंगाई 2% से नीचे बनी हुई है और आने वाले महीनों में इसके भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के लक्ष्य दायरे में रहने की संभावना है।

कृषि और उपभोग से मिली मजबूती

कृषि उत्पादन मजबूत रहा है। अनाज की रिकॉर्ड पैदावार और सरकारी भंडार में पर्याप्त स्टॉक के चलते ग्रामीण आय में सुधार हुआ है।

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इसके साथ ही पिछले बजट में की गई इनकम टैक्स राहत और जीएसटी सरलीकरण से उपभोक्ता खर्च को सहारा मिला है।

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भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस स्थिति को “गोल्डीलॉक्स फेज” बताया है—जहां विकास तेज़ है, महंगाई नियंत्रण में है और आर्थिक संतुलन बना हुआ है।

रोजगार की असली तस्वीर : चिंता बढ़ाती सुस्ती

सरकार भले ही बेरोज़गारी दर में गिरावट का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।देश की पांच बड़ी आईटी कंपनियों ने 2025 के पहले नौ महीनों में केवल 17 नए कर्मचारियों की भर्ती की, जो भारत के व्हाइट कॉलर जॉब मार्केट की कमजोरी को दर्शाता है।

आईटी सेक्टर, जिसने 1990 के बाद मध्यम वर्ग को आकार दिया था, अब एआई और ऑटोमेशन के चलते ठहराव का सामना कर रहा है।

निर्यात पर दबाव और ट्रंप टैरिफ़ की मार

भारत 2026 में ऐसे समय प्रवेश कर रहा है जब अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ़ का असर अब भी बना हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने यूरोपीय संघ सहित कई देशों से मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, लेकिन निर्यात में अपेक्षित तेजी नहीं दिखी।

HSBC के अनुसार,

“अमेरिका को होने वाला निर्यात लगातार कमजोर हुआ है, जबकि अन्य बाजारों में केवल सीमित सुधार दिखा है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

निवेश की सबसे बड़ी कमजोरी

अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चिंता निजी निवेश की सुस्ती है। JPMorgan के अर्थशास्त्री जहांगीर अज़ीज़ के मुताबिक,

“कॉरपोरेट निवेश 2012 से लगभग स्थिर है और जीडीपी के 12% के आसपास अटका हुआ है।”

उनका कहना है कि मांग कमजोर होने और पहले से मौजूद अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के कारण कंपनियां नया निवेश नहीं कर रहीं।

विदेशी निवेश क्यों घट रहा है?

रॉकफेलर इंटरनेशनल के चेयरमैन रुचिर शर्मा के अनुसार, भारत में अब भी ‘लाइसेंस राज’ जैसी बाधाएं मौजूद हैं, जिससे ज़मीन अधिग्रहण और श्रम सुधार कठिन बने हुए हैं।

उन्होंने लिखा कि

  • चीन और वियतनाम में एफडीआई जीडीपी का 4% तक पहुंचा
  • भारत में यह कभी 1.5% से ऊपर नहीं गया
  • फिलहाल यह गिरकर सिर्फ 0.1% रह गया है

बजट 2026 से क्या उम्मीदें?

विशेषज्ञों के मुताबिक इस बजट में सरकार का फोकस इन बिंदुओं पर रहेगा

  • PLI स्कीम का विस्तार
  • MSME और निर्यातकों को राहत
  • रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर में पूंजीगत खर्च
  • कस्टम ड्यूटी में आंशिक कटौती
  • राजकोषीय घाटे पर सख्त नियंत्रण

मजबूत आंकड़ों के पीछे छिपी चेतावनी

भारत की अर्थव्यवस्था ऊपर से भले मजबूत दिख रही हो, लेकिन

  • निजी निवेश की सुस्ती
  • रोजगार संकट
  • कमजोर निर्यात
  • घटता विदेशी निवेश

ये सभी संकेत बताते हैं कि बजट 2026 सरकार के लिए केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि भरोसा बहाल करने का भी इम्तिहान होगा।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि वित्त मंत्री सुधारों को कितनी प्राथमिकता देती हैं और क्या यह बजट भारत को विकास की राह पर ले जा पाएगा या नहीं।

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