लखनऊ में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य कई दिनों तक धरने पर बैठे रहे, जब सर्दी अपने चरम पर थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन परंपरा में कभी किसी शंकराचार्य को स्नान से नहीं रोका गया, लेकिन इस बार ऐसा हुआ।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार 20 साल पुरानी घटना को निकालकर शंकराचार्य को अपमानित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की भावना से जुड़ा कदम बताया।
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रामभद्राचार्य केस पर खुद को ठहराया जिम्मेदार
अखिलेश यादव ने अपने बयान में जगद्गुरु रामभद्राचार्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि शिकायतकर्ता उनका शिष्य है, तो उनसे गलती हुई कि उन्होंने अपने कार्यकाल में रामभद्राचार्य से जुड़े मुकदमे को वापस ले लिया। उन्होंने यहां तक कहा कि उन्हें जेल भेज देना चाहिए था।
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#WATCH | लखनऊ: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, “…शंकराचार्य कई दिनों तक धरने पर बैठे रहे, उस समय सर्दी चरम पर थी। हमारे सनातनी व्यवस्था में कहीं किसी शंकराचार्य को स्नान से रोका नहीं गया होगा लेकिन यह पहली बार हुआ है कि उन्हें स्नान से भी रोका गया… अब यह सरकार… pic.twitter.com/NJiJMXX77T
Advertisement— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 22, 2026
क्या था पूरा मामला?
IndianExpress के अनुसार मामला चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय से जुड़ा था। आरोप था कि विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताएं हुईं।
मुख्य आरोपों में शामिल थे
- वाहन खरीद के लिए स्वीकृत धन का अन्य निर्माण कार्यों में उपयोग
- नियुक्तियों में कथित अनियमितता
- प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी
करीब तीन साल की जांच के बाद वर्ष 2012 में मामला दर्ज किया गया। बाद में तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने इस केस को वापस लेने का फैसला किया था।





