मऊ। हत्या के मामले में सजा से बचने के लिए एक आरोपी ने अपनी मौत का ऐसा नाटक रचा कि परिवार ने उसकी तेरहवीं तक कर दी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने बकरे का शव जलवाया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से चिता पर लेटे होने की फर्जी तस्वीर तैयार कराई और कथित तौर पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर अदालत में जमा कर दिए। करीब डेढ़ साल तक साधु का भेष धारण कर फरारी काटने वाला आरोपी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
हत्या के मुकदमे में संभावित सजा से बचने के लिए एक आरोपी ने अपनी मौत का ऐसा नाटक रचा कि परिवार ने उसकी तेरहवीं तक कर दी। आरोप है कि उसने बकरे का शव जलवाया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से चिता पर लेटे होने की फर्जी तस्वीर तैयार कराई और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर अदालत में जमा कर दिए। इसके बाद वह साधु का भेष धारण कर फरार हो गया। करीब डेढ़ साल तक पुलिस को चकमा देने वाले आरोपी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान ख्वाजाजहांपुर निवासी राजू उर्फ राजकुमार राजभर (38) के रूप में हुई है। वह वर्ष 2016 में हुई योगेश सिंह की हत्या के मामले में वांछित था। इस प्रकरण में अदालत में सुनवाई चल रही थी। आरोपी को आशंका थी कि उसे उम्रकैद की सजा हो सकती है। इसी से बचने के लिए उसने खुद को मृत घोषित कराने की कथित साजिश रची।
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पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 30 मई 2025 को गाजीपुर में अपनी मौत का नाटक रचने की योजना को अंजाम दिया। कथित तौर पर AI की मदद से ऐसी तस्वीर तैयार कराई गई, जिसमें वह चिता पर लेटा दिखाई दे रहा था। इसके बाद बकरे का शव जलवाया गया, ताकि लोगों को उसकी मौत पर यकीन हो जाए। आरोप है कि श्मशान घाट और नगर पालिका से मृत्यु से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए। इन दस्तावेजों को अदालत में दाखिल करने के बाद आरोपी फरार हो गया। परिवार को उसकी मौत की सूचना दी गई और 11 जून को तेरहवीं का आयोजन भी किया गया। इस तरह आरोपी ने अपनी मौत की झूठी कहानी के जरिए कानून की पकड़ से बचने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान आरोपी साधु का भेष धारण कर रहता था। वह बीच-बीच में रात के समय अपनी पत्नी से मिलने घर भी पहुंचता था। राजमिस्त्री का काम करने के साथ वह ऑनलाइन ट्रेडिंग और क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार से भी जुड़ा था। पुलिस ने रविवार सुबह करीब नौ बजे ख्वाजाजहांपुर गांव से उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, राजकुमार और उसके मित्र सुदर्शन राजभर ने भट्ठा मालिक योगेश सिंह से ईंटें खरीदी थीं। रुपये मांगने को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद 19 दिसंबर 2016 को मुंशीपुरा रेलवे लाइन के पास योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक के भतीजे अविनाश सिंह की शिकायत पर कोतवाली नगर में राजकुमार और सुदर्शन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी मामले में कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी ने अपनी मौत का फर्जीवाड़ा रचने की कथित साजिश की। पुलिस अब इस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, आरोपी की कथित मौत के बाद उसकी पत्नी को करीब 10 लाख रुपये की बीमा राशि मिलने की जानकारी सामने आई है। जांच की जा रही है कि बीमा भुगतान किन परिस्थितियों में हुआ और क्या उसमें मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया था। फिलहाल बीमा संबंधी किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा, आरोपी के ट्रेडिंग कारोबार में कई लोगों के पैसे लगे होने की बात भी सामने आई है। इनमें दो होम्योपैथिक डॉक्टर भी शामिल बताए जा रहे हैं। आरोपी के कथित बयान के आधार पर पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि खुद को मृत घोषित कराने के पीछे सजा से बचने के अलावा निवेशकों की रकम लौटाने से बचने का उद्देश्य तो नहीं था।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराने, कथित बीमा भुगतान और अन्य लोगों की संभावित भूमिका से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।




